World Alzheimer’s Day: डिमेंशिया से दुनिया में 5.7 करोड़ लोग प्रभावित, जल्दी पहचान क्यों जरूरी

World Alzheimer’s Day 2026: उम्र बढ़ने के साथ भूलने की समस्या को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है। लेकिन जब याददाश्त में बदलाव रोजमर्रा के काम, बातचीत, फैसले लेने या सामान्य गतिविधियों को प्रभावित करने लगे, तो इसे सिर्फ उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Sunday, September 27, 2026

World Alzheimer’s Day 2026

World Alzheimer’s Day 2026: उम्र बढ़ने के साथ भूलने की समस्या को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है। लेकिन जब याददाश्त में बदलाव रोजमर्रा के काम, बातचीत, फैसले लेने या सामान्य गतिविधियों को प्रभावित करने लगे, तो इसे सिर्फ उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। World Alzheimer’s Day 2026 के मौके पर विशेषज्ञों और स्वास्थ्य संगठनों का ज़ोर इसी बात पर है कि डिमेंशिया के शुरुआती संकेतों को पहचानना और समय पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, 2021 में दुनियाभर में करीब 5.7 करोड़ लोग डिमेंशिया के साथ जी रहे थे और हर साल करीब 1 करोड़ नए मामले सामने आते हैं। डिमेंशिया के मामलों में Alzheimer’s disease सबसे आम कारण है और यह कुल मामलों के करीब 60-70 फीसदी के लिए जिम्मेदार हो सकता है। डिमेंशिया से प्रभावित 60 फीसदी से ज्यादा लोग निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं।

हर साल 21 सितंबर को World Alzheimer’s Day मनाया जाता है। यह World Alzheimer’s Month का हिस्सा है। Alzheimer’s Disease International ने 1994 में WHO के सहयोग से World Alzheimer’s Day की शुरुआत की थी। 2026 की थीम “The Earlier You Know, The More You Can Do: A Dementia Diagnosis Matters” है, जिसका फोकस बीमारी की जल्दी पहचान और diagnosis के महत्व पर है।

World Alzheimer’s Day 2026: Alzheimer’s disease सिर्फ भूलने की बीमारी नहीं

डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं बल्कि कई ऐसी बीमारियों और स्थितियों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है, जो दिमाग को प्रभावित करती हैं और याददाश्त, सोचने-समझने तथा रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को कम कर सकती हैं। Alzheimer’s disease इसका सबसे आम प्रकार है। इसके अलावा vascular dementia, dementia with Lewy bodies और frontotemporal dementia भी इसके प्रमुख प्रकारों में शामिल हैं। कुछ लोगों में एक से ज्यादा प्रकार का डिमेंशिया भी हो सकता है।

Alzheimer’s disease में याददाश्त कमजोर होना शुरुआती संकेतों में शामिल हो सकता है। बार-बार एक ही सवाल पूछना, परिचित जगहों पर रास्ता भूल जाना, सही शब्द खोजने में परेशानी, रोजमर्रा के कामों की योजना बनाने में दिक्कत, सामान बार-बार खोना या पहले आसानी से किए जाने वाले कामों में परेशानी भी संकेत हो सकते हैं। कुछ लोगों में व्यवहार, मूड और निर्णय लेने की क्षमता में भी बदलाव दिखाई दे सकता है।

हालांकि हर तरह की भूलने की समस्या Alzheimer’s disease नहीं होती। कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी याददाश्त और सोचने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए लगातार या बढ़ती हुई समस्या होने पर खुद से बीमारी का निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

जल्दी diagnosis होने से मरीज और परिवार को बीमारी को समझने, उपलब्ध इलाज और सहायता के विकल्पों पर विचार करने और भविष्य की देखभाल की योजना बनाने के लिए ज्यादा समय मिलता है। WHO के मुताबिक diagnosis उचित health और social care तक पहुंच की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है।

क्या Alzheimer’s का इलाज संभव है?

फिलहाल डिमेंशिया या Alzheimer’s disease का कोई पूर्ण इलाज नहीं है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मरीज के लिए उपचार के विकल्प नहीं हैं। कुछ दवाएं लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं, जबकि Alzheimer’s के कुछ मरीजों और बीमारी के खास चरणों में ऐसी नई दवाएं भी उपलब्ध हैं जो बीमारी की प्रक्रिया को target करती हैं। हालांकि ये दवाएं cure नहीं हैं और हर मरीज के लिए उपयुक्त भी नहीं होतीं।

WHO की 2026 की नई guidelines के मुताबिक डिमेंशिया के 45 फीसदी तक मामलों के जोखिम को संभावित रूप से रोका या देर से शुरू किया जा सकता है। इसके लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान से बचना, शराब का हानिकारक सेवन कम करना, संतुलित खान-पान, सामाजिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहना तथा blood pressure, blood sugar और cholesterol को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है। सुनने की क्षमता में कमी का इलाज और वायु प्रदूषण के संपर्क को कम करना भी risk reduction से जुड़े उपायों में शामिल हैं।

उम्र बढ़ना डिमेंशिया का सबसे बड़ा ज्ञात risk factor है, लेकिन डिमेंशिया को उम्र बढ़ने का अनिवार्य हिस्सा नहीं माना जाता। WHO के अनुसार high blood pressure, diabetes, obesity, depression, hearing और vision loss, stroke तथा सिर में गंभीर चोट जैसे कारक भी जोखिम से जुड़े हैं। शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान, हानिकारक alcohol use, सामाजिक अलगाव और वायु प्रदूषण भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं।

डिमेंशिया का असर सिर्फ मरीज तक सीमित नहीं रहता। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, व्यक्ति की स्वतंत्र रूप से रोजमर्रा के काम करने की क्षमता कम हो सकती है और परिवार के सदस्यों पर देखभाल का बोझ बढ़ सकता है। WHO के मुताबिक 2019 में डिमेंशिया की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर करीब 1.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का आर्थिक बोझ पड़ा था। इसका लगभग आधा हिस्सा परिवार और दोस्तों की ओर से दी जाने वाली unpaid care से जुड़ा था।

World Alzheimer’s Day 2026 का संदेश इसलिए सिर्फ Alzheimer’s के बारे में जागरूक होने तक सीमित नहीं है। लगातार बढ़ती भूलने की समस्या, सोचने-समझने में बदलाव या रोजमर्रा के कामों में अचानक परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच से मरीज और परिवार को बीमारी को समझने, इलाज और देखभाल के विकल्प तलाशने और आगे की योजना बनाने का अवसर मिल सकता है।

ये भी पढ़ें