WHO India Health Data: 143 करोड़ भारतीयों की सेहत का पूरा हाल, WHO के आंकड़ों से सामने आई बड़ी तस्वीर !

WHO India Health Data: भारत की आबादी 143 करोड़ से ज्यादा है। इतने बड़े देश में करोड़ों लोगों की सेहत, इलाज और स्वास्थ्य सुविधाएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं। लेकिन सवाल यह है कि भारत की असली स्वास्थ्य तस्वीर कैसी है? लोग कितने साल जी रहे हैं, किन

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Saturday, September 19, 2026

WHO India Health Data

WHO India Health Data: भारत की आबादी 143 करोड़ से ज्यादा है। इतने बड़े देश में करोड़ों लोगों की सेहत, इलाज और स्वास्थ्य सुविधाएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं। लेकिन सवाल यह है कि भारत की असली स्वास्थ्य तस्वीर कैसी है? लोग कितने साल जी रहे हैं, किन बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है और सरकार स्वास्थ्य पर कितना खर्च कर रही है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के भारत से जुड़े स्वास्थ्य आंकड़ों में इन सवालों के कई अहम जवाब मिलते हैं। इस जानकारी में आबादी, सरकारी स्वास्थ्य खर्च, औसत उम्र, मातृ और शिशु स्वास्थ्य, संक्रामक बीमारियों, लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों और स्वास्थ्यकर्मियों से जुड़े आंकड़े शामिल हैं। WHO के मुताबिक 2023 में भारत की आबादी 1,43,80,69,596 थी, जबकि 2021 में देश का कुल स्वास्थ्य खर्च सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP का 3.28% रहा।
WHO के भारत से जुड़े स्वास्थ्य आंकड़ों के मुताबिक भारत को WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में रखा गया है। विश्व बैंक की आय श्रेणी के हिसाब से भारत निचली-मध्यम आय वाले देशों में आता है। देश की विशाल आबादी और अलग-अलग स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए ये आंकड़े भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी तस्वीर समझने में मदद करते हैं।

WHO India Health Data में जीवन और स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख आंकड़े

WHO की देश से जुड़ी रिपोर्ट में औसत उम्र और स्वस्थ जीवन प्रत्याशा को भारत की स्वास्थ्य स्थिति के प्रमुख संकेतकों में शामिल किया गया है। जन्म के समय औसत उम्र के आंकड़े 2000 से 2021 तक उपलब्ध हैं। वहीं स्वस्थ जीवन प्रत्याशा यानी HALE यह बताती है कि जन्म के समय कोई व्यक्ति औसतन कितने साल अच्छे स्वास्थ्य के साथ जी सकता है। इसमें बीमारी या चोट के कारण खराब स्वास्थ्य में बिताए गए वर्षों को भी शामिल किया जाता है।

भारत में मौत के प्रमुख कारणों से जुड़े WHO के अनुमान 2021 के हैं। इनमें महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग आंकड़े भी उपलब्ध हैं। हालांकि WHO ने साफ किया है कि भारत में मौतों के पंजीकरण से जुड़े आंकड़ों की गुणवत्ता में समस्याओं के कारण मौत के कारणों से जुड़े अनुमानों को सावधानी से समझना चाहिए। ये अनुमान अलग-अलग स्रोतों और आंकड़ों के आधार पर तैयार किए गए हैं।

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भारत में स्वास्थ्य से जुड़े कई दूसरे संकेतक भी WHO के आंकड़ों में उपलब्ध हैं। एचआईवी के नए संक्रमण से जुड़ी देश की ताजा जानकारी 2023 की है, जबकि टीबी के नए मामलों के आंकड़े 2023 और मलेरिया के नए मामलों के आंकड़े 2022 पर आधारित हैं। हेपेटाइटिस बी से जुड़ी उपलब्ध जानकारी 2020 की है।
गैर-संचारी बीमारियों यानी लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों को लेकर भी WHO ने भारत के आंकड़े दर्ज किए हैं। इन बीमारियों से समय से पहले मौत की संभावना का आंकड़ा 2019 का है। उच्च रक्तचाप से जुड़ी उपलब्ध जानकारी भी 2019 की है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में लंबे समय तक चलने वाली बीमारियां स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों का WHO आंकड़ा 2021 का है। इसी तरह आत्महत्या और हत्या से जुड़ी उपलब्ध देश की जानकारी 2019 की है। वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों और असुरक्षित पानी, साफ-सफाई और स्वच्छता से जुड़ी मौतों के आंकड़े भी 2019 के हैं।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के मोर्चे पर WHO के भारत से जुड़े स्वास्थ्य आंकड़ों में मातृ मृत्यु का आंकड़ा 2023, जबकि पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु और नवजात मृत्यु का आंकड़ा 2022 का दिया गया है। इसके अलावा पांच साल से कम उम्र के बच्चों में उम्र के हिसाब से कम लंबाई यानी कद रुकने का आंकड़ा 2022 का है और बहुत कम वजन से जुड़े आंकड़ों के लिए WHO ने सबसे हाल की उपलब्ध जानकारी का उल्लेख किया है।

स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों में वयस्कों में मोटापे और बच्चों व किशोरों में मोटापे के आंकड़े 2022 के हैं। तंबाकू के इस्तेमाल की उपलब्ध जानकारी 2022 की है, जबकि शराब के सेवन का आंकड़ा 2020 का है। साथी द्वारा हिंसा से जुड़े आंकड़े 2018 के हैं।

बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं को देखें तो WHO की भारत से जुड़ी रिपोर्ट में सुरक्षित पेयजल, सुरक्षित साफ-सफाई, हाथ धोने की सुविधाएं, सुरक्षित तरीके से साफ किए गए गंदे पानी और साफ ईंधन जैसे संकेतकों के लिए 2022 की जानकारी दी गई है। हवा में मौजूद बारीक कण यानी PM2.5 से जुड़ी उपलब्ध जानकारी 2019 की है।

भारत के स्वास्थ्यकर्मियों की स्थिति को भी WHO ने अलग-अलग संकेतकों के जरिए दर्ज किया है। डॉक्टरों, नर्सों, दंत चिकित्सकों और दवा विशेषज्ञों की संख्या से जुड़े आंकड़ों के लिए देश की रिपोर्ट में 2022 की जानकारी दी गई है। इसी तरह 2023 में एक साल के बच्चों के बीच डीटीपी-3 टीकाकरण कवरेज का आंकड़ा उपलब्ध है। परिवार नियोजन और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मदद से होने वाले प्रसव के लिए WHO ने सबसे हाल की उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल किया है।
स्वास्थ्य पर खर्च की बात करें तो WHO के मुताबिक भारत का कुल स्वास्थ्य खर्च 2021 में GDP का 3.28% था। सरकार के सामान्य स्वास्थ्य खर्च से जुड़ी उपलब्ध जानकारी भी 2021 की है। वहीं चिकित्सा शोध और बुनियादी स्वास्थ्य क्षेत्रों के लिए विकास सहायता से जुड़ी देश की जानकारी 2022 की है।

WHO की भारत से जुड़ी रिपोर्ट में देश की स्वास्थ्य प्रगति को तीन अरब वाले ढांचे के तहत भी देखा गया है। इसमें बेहतर स्वास्थ्य वाली आबादी, सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधा और स्वास्थ्य आपात स्थितियों से सुरक्षा तीन प्रमुख क्षेत्र हैं। भारत के लिए 2018 से 2025 तक की प्रगति इसी ढांचे के तहत दिखाई गई है।
इन आंकड़ों को देखकर साफ है कि भारत की स्वास्थ्य कहानी किसी एक संकेतक से तय नहीं होती। एक तरफ टीकाकरण, स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और कई स्वास्थ्य परिणामों में प्रगति को देखा जा रहा है। दूसरी तरफ लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों, प्रदूषण, सड़क हादसों, मातृ और शिशु स्वास्थ्य तथा स्वास्थ्यकर्मियों जैसे क्षेत्रों में लगातार ध्यान देने की जरूरत बनी हुई है।

WHO के भारत से जुड़े स्वास्थ्य आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि सभी संकेतक एक ही साल के नहीं हैं। कुछ आंकड़े 2023 तक के हैं, जबकि कई दूसरे संकेतकों की सबसे हाल की उपलब्ध जानकारी 2019, 2020, 2021 या 2022 की है। इसलिए इन आंकड़ों को पढ़ते समय उनके संबंधित साल और WHO के आंकड़े जुटाने के तरीके को ध्यान में रखना जरूरी है।

भारत जैसे बड़े देश के लिए स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े सिर्फ संख्याओं का संग्रह नहीं हैं। यह बताते हैं कि देश की आबादी किस तरह बदल रही है, लोग कितने लंबे समय तक जी रहे हैं, किन बीमारियों और जोखिमों का असर बढ़ रहा है और स्वास्थ्य व्यवस्था के किन हिस्सों पर तुरंत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

 

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