केंद्र सरकार में 8.24 लाख पद खाली: 10 साल में दोगुनी हुई रिक्तियां, आधे कर्मचारी ठेके पर

केंद्र सरकार में खाली पद कितनी है ये जानने से पहले ये समझिये की केंद्र सरकार के दफ्तरों में कुर्सियां बढ़ीं, लेकिन उन पर बैठने वाले कम हो गए। यही सार है ताज़ा सरकारी आंकड़ों का। 80 मंत्रालयों और विभागों में खाली पदों की संख्या दस साल

EDITED BY: Md Aamir Iqbal

UPDATED: Tuesday, October 6, 2026

केंद्र सरकार में खाली पद

केंद्र सरकार में खाली पद कितनी है ये जानने से पहले ये समझिये की केंद्र सरकार के दफ्तरों में कुर्सियां बढ़ीं, लेकिन उन पर बैठने वाले कम हो गए। यही सार है ताज़ा सरकारी आंकड़ों का।

80 मंत्रालयों और विभागों में खाली पदों की संख्या दस साल में करीब दोगुनी हो गई है। 2015 में 4.21 लाख पद खाली थे, 2024 में यह आंकड़ा 8.24 लाख पर पहुंच गया। यानी आज केंद्र सरकार का हर पांचवां मंजूर पद खाली है।

एक नज़र में
1. खाली पद: 4.21 लाख (2015) से बढ़कर 8.24 लाख (2024)
2. रिक्ति दर: 11.5% से बढ़कर करीब 21%
3. सबसे ऊपर कॉमर्स विभाग: 55.4% पद खाली
4. डाक विभाग: खाली पद 7,561 से बढ़कर 61,546
5. सरकारी कंपनियां: ठेका कर्मचारियों की हिस्सेदारी 18.6% से बढ़कर करीब 49%

पद बढ़े, कर्मचारी घटे

दस साल में सरकार ने कागज़ पर नए पद तो मंजूर किए, पर उन्हें भरा नहीं गया। केंद्र सरकार के सिविल कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, 80 मंत्रालयों और विभागों की तस्वीर इस तरह बदली

20152024
कुल मंजूर पद36,49,46839,23,212
भरे हुए पद32,28,92130,99,656
खाली पद4,20,5478,23,556
रिक्ति दर11.5%करीब 21%

यानी दस साल में मंजूर पद करीब 2.74 लाख बढ़े, लेकिन भरे हुए पदों की संख्या करीब 1.29 लाख घट गई।

डिफेंस में सबसे ज्यादा खाली पद

रिक्त पदों की संख्या के लिहाज से डिफेंस के सिविलियन पद सबसे ऊपर हैं। यहां करीब 2.42 लाख पद खाली हैं। डिफेंस में कुल मंजूर पदों के मुकाबले रिक्तियों की दर भी 2015 के 31.9 फीसदी से बढ़कर 2024 में 43.4 फीसदी हो गई।

रेलवे में भी बड़ी संख्या में पद खाली हैं। 2024 में रेलवे में करीब 2.40 लाख पद रिक्त बताए गए हैं, जो कुल मंजूर पदों का लगभग 16.2 फीसदी है।

डाक विभाग में भी खाली पदों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। 2015 में जहां 7,561 पद खाली थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 61,546 हो गई।

कॉमर्स विभाग में 55 फीसदी से ज्यादा पद खाली

रिक्तियों की दर के मामले में कॉमर्स विभाग सबसे ऊपर है। 2024 में यहां 55.4 फीसदी पद खाली थे। 2015 में यह आंकड़ा 37.1 फीसदी था।

इसके अलावा सिविल एविएशन विभाग में 45.2 फीसदी और लेबर विभाग में 41.5 फीसदी पद खाली बताए गए हैं।

गृह मंत्रालय में भी मंजूर पदों और भरे हुए पदों के बीच अंतर बढ़ा है। पिछले एक दशक में गृह मंत्रालय में मंजूर पद करीब 1.02 लाख बढ़े, जबकि कर्मचारियों की संख्या करीब 49,621 बढ़ी। इसके चलते खाली पदों की संख्या 58,774 से बढ़कर 1,10,885 हो गई।
केंद्र सरकार में खाली पद

सरकारी कंपनियों में ठेके पर कर्मचारियों की संख्या बढ़ी

सरकारी कंपनियों यानी पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स में भी नियमित कर्मचारियों की तुलना में ठेके पर काम करने वालों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।

पब्लिक एंटरप्राइजेज सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 में 298 सरकारी कंपनियों में कुल 15,87,149 कर्मचारी थे। इनमें 2,95,975 कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे थे। यानी कुल कर्मचारियों में ठेका कर्मचारियों की हिस्सेदारी करीब 18.6 फीसदी थी।

2025 में 475 सरकारी कंपनियों में कुल 15,42,339 कर्मचारी थे। इनमें 7,83,728 नियमित कर्मचारी थे, जबकि 7,58,611 कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे थे। यानी ठेका कर्मचारियों की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 49.1 फीसदी हो गई।

इस तरह दस साल में सरकारी कंपनियों में ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों की हिस्सेदारी करीब ढाई गुना बढ़ गई।

केंद्र सरकार में खाली पद की जगह आउटसोर्सिंग पर जोर

सरकारी विभागों में खाली पदों के बीच आउटसोर्सिंग का चलन भी बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी विभाग खाली पदों पर कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग के लिए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस यानी GeM का इस्तेमाल करते हैं।

पिछले साल GeM के जरिए करीब 10 लाख कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग किए जाने का दावा किया गया है। जानकारों के मुताबिक, कुछ विभागों में कर्मचारियों की नियुक्ति सीधे करने के बजाय सेवाओं को कंपनियों के जरिए आउटसोर्स करने का चलन बढ़ रहा है।

हालांकि, नियमित सरकारी पदों की रिक्तियों और आउटसोर्स कर्मचारियों के आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है। आउटसोर्सिंग से किसी खाली स्वीकृत सरकारी पद की औपचारिक नियुक्ति नहीं होती।

सरकारी तंत्र पर क्या असर?

एक तरफ केंद्र सरकार में मंजूर पदों की संख्या बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ भरे हुए पदों की संख्या में कमी और खाली पदों में बढ़ोतरी हुई है। डिफेंस, रेलवे, डाक, कॉमर्स और सिविल एविएशन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रिक्तियां सरकारी सेवाओं की क्षमता और काम के बोझ को प्रभावित कर सकती हैं।

वहीं सरकारी कंपनियों में ठेका कर्मचारियों की बढ़ती हिस्सेदारी यह सवाल भी उठाती है कि सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार का स्वरूप किस तरह बदल रहा है।

कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार के स्वीकृत पदों और वास्तविक कर्मचारियों की संख्या के बीच अंतर बढ़ा है। साथ ही सरकारी कंपनियों में नियमित रोजगार की तुलना में ठेका आधारित काम का हिस्सा भी काफी बढ़ा है।

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