Delhi Air Pollution : हर सर्दी में दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण की चर्चा होते ही एक सवाल सामने आता है—क्या दिल्ली की खराब हवा के लिए सिर्फ खेतों में फसल के बचे हिस्से को जलाना जिम्मेदार है?
दिल्ली में वायु प्रदूषण (Delhi Air Pollution) की समस्या कई अलग-अलग कारणों से जुड़ी हुई है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क और निर्माण की धूल, उद्योग, कूड़ा और फसल के बचे हिस्से को जलाना—ये सभी मिलकर हवा को खराब करते हैं।
दिल्ली की हवा कितनी खराब है?
Commission for Air Quality Management (CAQM) के अनुसार, 2025 में दिल्ली में PM2.5 का सालाना औसत स्तर 97 µg/m³ रहा। जबकि भारत में PM2.5 की सालाना सीमा 40 µg/m³ है। यानी दिल्ली का सालाना औसत स्तर राष्ट्रीय सीमा से करीब 2.4 गुना ज्यादा रहा। इसी तरह 2025 में PM10 का सालाना औसत स्तर 198 µg/m³ रहा। PM2.5 हवा में मौजूद बेहद छोटे कण होते हैं, जो सांस के साथ शरीर के अंदर तक जा सकते हैं।
प्रदूषण आता कहां से है?
CAQM ने 2015 से 2025 के बीच किए गए अलग-अलग अध्ययनों का विश्लेषण किया है। इसके अनुसार प्रदूषण के कारण मौसम के साथ बदलते हैं।
प्रदूषण का कारण | सर्दियों में | गर्मियों में |
हवा में रासायनिक प्रक्रिया से बनने वाले छोटे कण| | 27% | 17% |
वाहन और परिवहन | 23% | 19% |
फसल के बचे हिस्से/अन्य चीजों को जलाना | 20% | 12% |
धूल | 15% | 27% |
उद्योग और पावर प्लांट | 9% | 14% |
| अन्य कारण | 6% | 11% |
स्रोत: CAQM के 2015–2025 के Source Apportionment Studies का विश्लेषण। इस आंकड़े से एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है—दिल्ली के प्रदूषण का कोई एक कारण नहीं है।
हवा में बनने वाले ये छोटे कण क्या हैं?
प्रदूषण के आंकड़ों में एक शब्द अक्सर आता है—Secondary Particulate Matter, आसान भाषा में समझें तो कुछ गैसें वाहनों, उद्योगों, पावर प्लांट और जलने वाली चीजों से हवा में जाती हैं। बाद में ये गैसें हवा में आपस में रासायनिक प्रतिक्रिया करती हैं और बहुत छोटे प्रदूषित कण बनाती हैं। सर्दियों में ऐसे कण दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण का करीब 27% हिस्सा बनाते हैं। इसलिए प्रदूषण को सिर्फ उस धुएं से नहीं समझा जा सकता जिसे हम अपनी आंखों से देख पाते हैं।
क्या फसल के बचे हिस्से को जलाना जिम्मेदार है?
हां, लेकिन यह पूरी कहानी नहीं है। सर्दियों में फसल के बचे हिस्से को जलाने से होने वाला प्रदूषण एक महत्वपूर्ण कारण है। CAQM के विश्लेषण में सर्दियों के PM2.5 में Biomass Burning का हिस्सा करीब 20% बताया गया है। लेकिन इस श्रेणी में केवल खेतों में फसल के बचे हिस्से को जलाना ही नहीं, बल्कि दूसरी तरह की जलाने की गतिविधियां भी शामिल होती हैं। इसलिए दिल्ली की हर खराब हवा को सिर्फ खेतों में लगने वाली आग से जोड़ना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
दिल्ली का प्रदूषण (Delhi Air Pollution) सिर्फ सर्दियों की समस्या नहीं है, अगर प्रदूषण की समस्या केवल फसल जलाने के कारण होती, तो बाकी महीनों में दिल्ली की हवा काफी बेहतर होनी चाहिए। लेकिन सालाना आंकड़े बताते हैं कि समस्या पूरे साल बनी रहती है।
2018 में दिल्ली का सालाना PM2.5 औसत 114 µg/m³ था। 2020 में यह 95 तक आया और 2025 में 97 µg/m³ रहा। PM10 का स्तर भी 2018 में 242 µg/m³ से घटकर 2025 में 198 µg/m³ हुआ। इसमें सुधार जरूर हुआ है, लेकिन यह स्तर अभी भी राष्ट्रीय सालाना सीमा से काफी ऊपर है।

वाहनों और धूल की भी बड़ी भूमिका
दिल्ली अकेली नहीं है। दिल्ली के आसपास गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और NCR के दूसरे शहर आपस में जुड़े हुए हैं। लाखों लोग रोज इन शहरों के बीच सफर करते हैं। CAQM के विश्लेषण के मुताबिक, सर्दियों में परिवहन से PM2.5 प्रदूषण का करीब 23% और गर्मियों में करीब 19% हिस्सा आता है। वहीं गर्मियों में धूल करीब 27% के साथ सबसे बड़ा हिस्सा बन जाती है। इसमें सड़क की धूल, मिट्टी और निर्माण से जुड़ी धूल शामिल हो सकती है। यानी प्रदूषण को केवल दिल्ली की सीमा के अंदर देखकर समझना मुश्किल है। पूरे NCR में होने वाली गतिविधियां हवा को प्रभावित करती हैं।
प्रदूषण का असर सिर्फ AQI तक सीमित नहीं
जब AQI 300 या 400 के ऊपर जाता है, तब लोगों को प्रदूषण साफ दिखाई और महसूस होने लगता है। लेकिन असली चिंता लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने की है। एक peer-reviewed study में 2015 से 2019 के बीच दिल्ली में PM2.5 के संपर्क से जुड़ी 56,876 premature deaths का अनुमान लगाया गया। इसी अध्ययन ने इससे जुड़े आर्थिक नुकसान का अनुमान करीब 157 अरब डॉलर लगाया। यह आंकड़ा सीधे गिने गए मृतकों की संख्या नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक मॉडल के आधार पर लगाया गया अनुमान है। इसलिए इसे उसी रूप में समझना जरूरी है।Scientific Reports — Respiratory deposition of particulate matter in Delhi
Delhi Air Pollution, असली समस्या क्या है?
दिल्ली-NCR का वायु प्रदूषण (Delhi Air Pollution) किसी एक स्रोत या एक राज्य की समस्या नहीं है। फसल के बचे हिस्से को जलाना इसका एक हिस्सा है, खासकर सर्दियों में। लेकिन इसके साथ वाहन, सड़क और निर्माण की धूल, उद्योग, कूड़ा जलाना और हवा में बनने वाले छोटे प्रदूषित कण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
इसलिए समाधान भी एक जगह या एक कारण पर निर्भर नहीं हो सकता। बेहतर सार्वजनिक परिवहन, वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण, निर्माण और सड़क की धूल को कम करना, उद्योगों पर निगरानी, कूड़ा जलाने पर रोक और खेतों में फसल के बचे हिस्से को जलाने के विकल्प—इन सभी पर एक साथ काम करना जरूरी है। आखिर में बात बहुत सीधी है—हवा यह नहीं देखती कि प्रदूषण दिल्ली से आया, हरियाणा से या उत्तर प्रदेश से। NCR के लोग उसी हवा में सांस लेते हैं।




