85 की उम्र में MA, 965 अंक; हरियाणा के पूर्व सैनिक लालचंद गोदारा अब PhD या Law की तैयारी में

सिरसा: पढ़ाई शुरू करने की कोई तय उम्र नहीं होती, इसे हरियाणा के सिरसा निवासी पूर्व सैनिक लालचंद गोदारा ने अपनी जिंदगी से साबित किया है। 85 साल की उम्र में उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से Master of Arts (MA) की पढ़ाई पूरी की

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Wednesday, September 23, 2026

लालचंद गोदारा

सिरसा: पढ़ाई शुरू करने की कोई तय उम्र नहीं होती, इसे हरियाणा के सिरसा निवासी पूर्व सैनिक लालचंद गोदारा ने अपनी जिंदगी से साबित किया है। 85 साल की उम्र में उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से Master of Arts (MA) की पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने 1,200 में से 965 अंक हासिल किए हैं। खास बात यह है कि लालचंद गोदारा ने 76 साल की उम्र में दोबारा पढ़ाई शुरू की थी और 81 साल की उम्र में अपनी Graduation की डिग्री हासिल की थी। अब उनका अगला लक्ष्य PhD या Law की पढ़ाई करना है।

लालचंद गोदारा के लिए शिक्षा की यह यात्रा अचानक शुरू नहीं हुई। उनका कहना है कि शिक्षा उनके जीवन का एक अधूरा अध्याय थी। परिवार और परिस्थितियों के कारण वह अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके थे। बाद में उन्होंने भारतीय सेना में सेवा की और 1962, 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान देश की सेवा की। सेना से जुड़ी जिम्मेदारियों के बाद उन्होंने हरियाणा परिवहन विभाग में Yard Master के रूप में काम किया। वह 1972 से 2002 तक विभाग में रहे।

लालचंद गोदारा की पढ़ाई के साथ खेलों में भी सक्रियता

सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद लालचंद गोदारा ने अपना समय सिर्फ आराम में नहीं बिताया। उन्होंने Masters Athletics में हिस्सा लेना शुरू किया और हरियाणा के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया। उनके परिवार के मुताबिक, उनके नाम करीब 200 पदक हैं, जिनमें लगभग 150 Gold, 30 Silver और 20 Bronze Medal शामिल हैं।

इसी सक्रिय जीवन के बीच 76 साल की उम्र में उन्होंने दोबारा किताबें उठाईं। इसके पांच साल बाद, 81 की उम्र में उन्होंने Graduation पूरी की। इसके बाद उन्होंने IGNOU में MA programme में दाखिला लिया और अब 85 साल की उम्र में 965 अंक के साथ Postgraduate degree हासिल की है।

लालचंद गोदारा का कहना है कि शिक्षा सिर्फ डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे व्यक्ति का नजरिया व्यापक होता है। उनका मानना है कि उम्र किसी व्यक्ति के सीखने की इच्छा तय नहीं करनी चाहिए। MA की डिग्री हासिल करने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई को विराम नहीं दिया है। अब वह PhD या Law degree में से किसी एक को आगे की मंजिल के तौर पर देख रहे हैं।

76 की उम्र में पढ़ाई दोबारा शुरू करने से लेकर 81 में Graduation और 85 में MA पूरा करने तक Lal Chand Godara की कहानी शिक्षा, खेल और सक्रिय जीवन के बीच लगातार आगे बढ़ते रहने की मिसाल बनकर सामने आई है।

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