MPMS Scheme को मिली मंजूरी, भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा; जानिए क्या बदलेगा

MPMS Scheme को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद भारत के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (Mobile Phone Manufacturing Scheme) को स्वीकृति दी गई, जिसके लिए सरकार ने

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Wednesday, July 15, 2026

MPMS Scheme

MPMS Scheme को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद भारत के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (Mobile Phone Manufacturing Scheme) को स्वीकृति दी गई, जिसके लिए सरकार ने 62,500 करोड़ का बजट तय किया है।

सरकार का उद्देश्य भारत को केवल मोबाइल असेंबली हब नहीं, बल्कि डिजाइन, रिसर्च और कंपोनेंट निर्माण के क्षेत्र में भी वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है। नई योजना के जरिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बनाने पर फोकस किया जाएगा।

क्या है MPMS Scheme?

MPMS Scheme केंद्र सरकार की नई प्रोत्साहन योजना है, जिसका मकसद भारत में मोबाइल फोन और उससे जुड़े कंपोनेंट्स का निर्माण बढ़ाना है।

इस योजना के तहत मोबाइल बनाने वाली कंपनियों को उनकी पात्र बिक्री (Eligible Sales) के आधार पर वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे भारत में निवेश बढ़ेगा, नई फैक्ट्रियां स्थापित होंगी और स्थानीय सप्लाई चेन पहले से ज्यादा मजबूत होगी।

कब तक लागू रहेगी यह योजना?

सरकार के मुताबिक यह स्कीम वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। यानी अगले पांच वर्षों तक मोबाइल निर्माण से जुड़ी कंपनियां इस योजना का लाभ उठा सकेंगी।

कंपनियों को कितना मिलेगा इंसेंटिव?

नई नीति के तहत पात्र कंपनियों को उनकी बिक्री के आधार पर 2.25% से 5% तक इंसेंटिव दिया जाएगा।

इसके अलावा यदि कोई कंपनी मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण पार्ट्स और सब-असेंबली भारत में ही तैयार करती है या स्थानीय स्तर पर खरीदती है, तो उसे 1.5% तक अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा।
वहीं भारतीय ब्रांड्स को डिजाइन, इनोवेशन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को बढ़ावा देने के लिए 3% का अलग इंसेंटिव देने का भी प्रावधान रखा गया है।

सरकार को क्या है उम्मीद?

सरकार का अनुमान है कि इस योजना के लागू होने के बाद देश में मोबाइल फोन उत्पादन का कुल मूल्य 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
साथ ही मोबाइल फोन निर्यात में भी तेज बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे भारत की वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में हिस्सेदारी और मजबूत होगी।
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रोजगार पर भी पड़ेगा बड़ा असर

इस योजना से केवल उद्योग को ही नहीं, बल्कि रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकारी अनुमान के अनुसार करीब 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में भी बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार बनने की संभावना है।

भारत क्यों दे रहा है मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर?

पिछले कुछ वर्षों में भारत दुनिया के प्रमुख स्मार्टफोन निर्माण केंद्रों में शामिल हुआ है। सरकार के अनुसार 2014-15 के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सात गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी कई गुना इजाफा हुआ है।

आज भारत वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल फोन निर्माण देशों में शामिल है और देश में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश मोबाइल फोन अब भारत में ही बनाए जा रहे हैं।

क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि MPMS Scheme से केवल विदेशी कंपनियों को ही नहीं, बल्कि भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड्स को भी फायदा मिलेगा। यदि स्थानीय स्तर पर कंपोनेंट निर्माण बढ़ता है, तो भविष्य में उत्पादन लागत कम हो सकती है और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा सकता है।

MPMS Scheme को मंजूरी मिलना भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। ₹62,500 करोड़ के निवेश वाली यह योजना उत्पादन, निर्यात, रोजगार और घरेलू तकनीकी विकास को नई गति दे सकती है। अब उद्योग की नजर इस बात पर होगी कि कंपनियां इस योजना का कितना लाभ उठाती हैं और भारत वैश्विक मोबाइल निर्माण बाजार में कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।

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