महिला पहलवानों के यौन शोषण से जुड़े बहुचर्चित मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व कुश्ती महासंघ अध्यक्ष Brijbhushan Sharan के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और ट्रायल कोर्ट द्वारा तय किए गए आरोपों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दलीलें पेश न किए जाने पर नाराज़गी जताई है।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की एकल पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह याचिका वर्ष 2024 में दाखिल की गई थी, लेकिन अब तक याचिकाकर्ता की ओर से ठोस दलीलें नहीं रखी जा रही हैं। कोर्ट ने इस रवैये को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई की तारीख 21 अप्रैल तय की है।
Brijbhushan Sharan ने समय मांगने पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान Brijbhushan Sharan की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से दलीलें रखने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। इस पर हाईकोर्ट ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मामला लंबे समय से लंबित है और अब इसे और टालने का कोई औचित्य नहीं है।
कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि इस याचिका पर पहले ही कई बार सुनवाई हो चुकी है, इसके बावजूद याचिकाकर्ता की ओर से मामले के गुण-दोष पर बहस नहीं की जा रही।

हाईकोर्ट का पहले का रुख भी सख्त
गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट पहले भी इस मामले में बृजभूषण शरण सिंह को राहत देने से इनकार कर चुका है। 29 अगस्त 2024 को कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि जब ट्रायल शुरू हो चुका है, तब आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देना उचित नहीं है।हाईकोर्ट ने उस समय टिप्पणी की थी कि याचिकाकर्ता परोक्ष रूप से पूरे आपराधिक मामले को ही खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता।
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