Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2026- युवाओं में इच्छाशक्ति और सही निर्णय क्षमता से ही बनेगा मजबूत भारत: NSA Ajit Doval

नई दिल्ली में Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2026 के मंच से देश के भविष्य की रूपरेखा उभरती दिखाई दी, जहाँ नेतृत्व, संकल्प और राष्ट्रनिर्माण पर विचारों की गूंज सुनाई दी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के प्रेरक संबोधन से लेकर युवाओं की नीति-निर्माण में बढ़ती भागीदारी

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Sunday, January 11, 2026

Viksit Bharat Young Leaders Dialogue

नई दिल्ली में Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2026 के मंच से देश के भविष्य की रूपरेखा उभरती दिखाई दी, जहाँ नेतृत्व, संकल्प और राष्ट्रनिर्माण पर विचारों की गूंज सुनाई दी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के प्रेरक संबोधन से लेकर युवाओं की नीति-निर्माण में बढ़ती भागीदारी तक, यह संवाद भारत की युवा शक्ति को दिशा देने और विकसित भारत के संकल्प को सशक्त करने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव बना।

अजीत डोभाल का युवाओं को नेतृत्व मंत्र

Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2026 के दूसरे सत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए नेतृत्व, सही निर्णय क्षमता और इच्छाशक्ति के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भविष्य का नेता वही बन सकता है जो समय की मांग को समझते हुए दूरदर्शिता और अनुशासन के साथ निर्णय ले। अपने संबोधन में उन्होंने अरुणिमा सिन्हा का प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि अरुणिमा एक राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल और फुटबॉल खिलाड़ी थीं, जिन्हें अप्रैल 2011 में चेन स्नैचिंग का विरोध करने पर चोरों ने चलती ट्रेन से बाहर धकेल दिया। समानांतर ट्रैक पर आ रही दूसरी ट्रेन से उनका पैर बुरी तरह कुचल गया, जिसके बाद डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए घुटने के नीचे से पैर काटना पड़ा। इसके बावजूद अरुणिमा ने हार नहीं मानी और अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर जीवन में आगे बढ़ते हुए असंभव को संभव कर दिखाया।

अजीत डोभाल ने इस उदाहरण के माध्यम से युवाओं को यह संदेश दिया कि परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, संकल्प, आत्मविश्वास और सही निर्णय क्षमता व्यक्ति को महान बना सकती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे खुद पर विश्वास रखें और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।मई 2013 में, अपने एक्सीडेंट के दो साल से भी कम समय में, सिन्हा माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुँच गईं, जो एक ऐसा कारनामा है जिसके लिए बिना किसी अंग की कमी वाले लोगों को भी बहुत ज़्यादा शारीरिक ताकत की ज़रूरत होती है।
Viksit Bharat Young Leaders Dialogue

निर्णय, अनुशासन और इच्छाशक्ति पर ज़ोर

अपने संबोधन में उन्होंने देश के भविष्य और युवाओं की भूमिका पर केंद्रित एक प्रेरणादायक विचार सांझा किए जिसमें कहा गया कि आपका निर्माण केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि सही समय पर लिए गए सही निर्णयों, अनुशासन और मजबूत इच्छाशक्ति से होगा। वक्तव्य में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि नेतृत्व वही कर सकता है जो दूरदर्शिता के साथ निर्णय ले और उन्हें पूरी निष्ठा से लागू करे।

विचारों में कहा गया कि सपने जीवन नहीं बनाते, लेकिन वे दिशा जरूर देते हैं। सपनों को साकार करने के लिए ठोस कार्ययोजना और क्रियान्वयन आवश्यक है। केवल प्रेरणा अस्थायी होती है, जबकि अनुशासन और निरंतर प्रयास ही स्थायी सफलता की नींव रखते हैं। युवाओं को हर कदम उठाने से पहले दो कदम सोचने की सीख दी गई।

युवाओं से आत्मविश्वास और साहस की अपील

इतिहास का उल्लेख करते हुए अजीत डोभाल ने कहा कि भारत की आज़ादी हमारे पूर्वजों के बलिदानों का परिणाम है। फाँसी, यातनाएँ और संघर्ष केवल इतिहास नहीं, बल्कि चेतावनी हैं कि यदि हमने उनसे सबक नहीं लिया तो आने वाली पीढ़ियों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। वक्तव्य में यह भी कहा गया कि किसी भी देश को कमजोर करने के लिए उसके मनोबल को तोड़ा जाता है। यदि इच्छाशक्ति नहीं है तो हथियार भी बेकार साबित होते हैं। युवाओं से आह्वान किया गया कि वे निर्णय लेने में देर न करें, हार न मानें और स्वयं पर विश्वास रखें। अंत में संदेश दिया गया कि भारत को ऐसे नेतृत्व और युवाओं की आवश्यकता है जो आज ही कल की तैयारी करें और अपने संकल्प, मेहनत व विश्वास से देश को हर क्षेत्र में मजबूत बनाएं।

मनसुख मांडविया का “नेशन फर्स्ट” संदेश

इस दिशा में माननीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री मंसुख लखमनभाई मांडविया जी भी मंचासीन रहे और उन्होनें भी युवाओं को विकसित भारत के लिए प्रेरित किया। उन्होनें कहा कि आज भारत एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ युवा नेतृत्व ही देश के भविष्य की दिशा तय करेगा। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का स्पष्ट संदेश है कि विकसित भारत केवल एक सपना नहीं, बल्कि जीने का तरीका होना चाहिए। यही कारण है कि विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग जैसे मंचों के माध्यम से युवाओं के विचार सीधे नीति निर्माण और शासन व्यवस्था तक पहुँचाए जा रहे हैं।

युवाओं की नीति निर्माण में सीधी भागीदारी

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख लक्ष्मणभाई मांडविया ने विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 (Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2026) के सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का भविष्य आज के युवाओं के संकल्प, सोच और नेतृत्व पर निर्भर करता है। उन्होंने युवाओं को “नेशन फर्स्ट” के मंत्र के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं युवाओं के विचार सुनेंगे, ताकि “विकसित भारत कैसे जिए, देश की नीतियाँ किस दिशा में जाएं और शासन व्यवस्था को कैसे और प्रभावी बनाया जाए”—इन सभी विषयों पर युवाओं के सुझाव सीधे नीति निर्माण का हिस्सा बन सकें।

विकसित भारत का संकल्प

मांडविया ने कहा कि लक्ष्य केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि एक लाख ऐसे युवा नेता तैयार करना है जो जमीनी स्तर से देश के विकास में भागीदार बनें। मंत्री ने कहा कि कोविड के बाद भारत ने 7 से 8 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखी है, जो मजबूत नीतियों और युवा शक्ति का परिणाम है। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में रोजगार दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और सरकार हर क्षेत्र में अवसर बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैअपने संबोधन के अंत में उन्होंने युवाओं से सवाल किया— “विकसित भारत बनाएगा कौन?” और स्वयं उत्तर दिया— “विकसित भारत आप बनाएंगे, आपका संकल्प, आपकी सोच और आपका नेतृत्व भारत की दिशा तय करेगा।”

प्रधानमंत्री स्वयं युवाओं के विचार सुनना चाहते हैं, क्योंकि आने वाले समय की नीतियाँ, शासन की दिशा और देश की प्राथमिकताएँ आज के युवाओं के सोच और सुझावों से तय होंगी। यह पहली बार है जब युवाओं को सिर्फ सुनने वाला नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया का भागीदार बनाया जा रहा है। कोविड के बाद भी भारत ने 7 से 8 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखी है, जो यह दर्शाता है कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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