शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को माघ शुक्ल पंचमी के दिन पूरे बिहार समेत देशभर में Saraswati Puja श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। माघ शुक्ल पंचमी को होने के कारण इसे वसंत पंचमी भी कहा जाता है। यह दिन विद्या, बुद्धि, वाणी और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है।
Saraswati Puja :विद्यार्थियों और ज्ञान साधकों के लिए विशेष दिन
Saraswati Puja का विशेष महत्व विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों और ज्ञान से जुड़े लोगों के लिए माना जाता है। इस दिन मां सरस्वती की आराधना से बुद्धि, स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ने की मान्यता है।ईटीवी भारत से बातचीत में पंडित राजन उपाध्याय ने बताया कि सरस्वती पूजा माघ शुक्ल पंचमी तिथि में करना अत्यंत शुभ होता है।इस वर्ष पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7:15 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक रहेगा।
वहीं 11:40 बजे से 12:28 बजे तक का अभिजीत मुहूर्त पूजा के लिए सबसे उत्तम माना गया है।

पूजा विधि कैसे करें
पंडित राजन उपाध्याय के अनुसार, सरस्वती पूजा में शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल पर पीले या सफेद वस्त्र पर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पीले फूल, अक्षत, हल्दी, केसर, फल और मिठाई अर्पित करें।किताब, कलम और वाद्य यंत्र मां के चरणों में रखें और “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप कर आरती करें।
क्यों मनाई जाती है सरस्वती पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। उन्हें ज्ञान, विवेक और वाणी की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। वसंत पंचमी से वसंत ऋतु का आगमन होता है, जो नई ऊर्जा, सृजन और सकारात्मकता का प्रतीक है।मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से बुद्धि तेज होती है और पढ़ाई में मन लगता है|






