Kalpana Chawla भारत के इतिहास में 16 जनवरी की तारीख अंतरिक्ष क्षेत्र की बड़ी उपलब्धियों के लिए विशेष महत्व रखती है। यह दिन उन घटनाओं का गवाह रहा है, जिन्होंने भारत का नाम वैश्विक अंतरिक्ष मानचित्र पर और मजबूत किया।
Kalpana Chawla की दूसरी अंतरिक्ष उड़ान
भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री Kalpana Chawla ने 16 जनवरी 2003 को स्पेस शटल कोलंबिया से अपनी दूसरी अंतरिक्ष यात्रा शुरू की थी। यह मिशन ऐतिहासिक था, लेकिन दुर्भाग्यवश 16 दिन बाद पृथ्वी पर लौटते समय 1 फरवरी 2003 को यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें कल्पना चावला समेत सातों अंतरिक्ष यात्रियों की जान चली गई।

सुनीता विलियम्स की ऐतिहासिक स्पेसवॉक
इस घटना के 22 साल बाद, 16 जनवरी 2025 को एक और भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में अपनी पहली स्पेसवॉक की। यह उनके करियर की आठवीं स्पेसवॉक थी। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर जून 2024 में बोइंग के स्टारलाइनर कैप्सूल से आईएसएस पहुंचे थे, लेकिन तकनीकी कारणों से उनकी वापसी में देरी हुई। लगभग 9 महीने 13 दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद वे 19 मार्च 2025 को सुरक्षित धरती पर लौटे।
ISRO की बड़ी कामयाबी: स्पेस डॉकिंग
16 जनवरी 2025 को ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने ‘स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट’ (SPADEX) के तहत एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। ‘चेजर’ और ‘टारगेट’ उपग्रहों की सफल डॉकिंग के साथ भारत यह तकनीक हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बना। इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन इस क्षेत्र में सफलता पा चुके थे।






