पोंगल त्योहार के मौके पर तमिलनाडु के पुदुकोट्टई जिले के पास वडामालपुरम में भव्य Jallikattu Festival in Tamil Nadu प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस पारंपरिक खेल को देखने के लिए आसपास के गांवों और दूर-दराज़ के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
Jallikattu Festival in Tamil Nadu के मंदिर परिसर में हुआ आयोजन
यह Jallikattu Festival in Tamil Nadu कार्यक्रम पिडारी अम्मन और करुप्पर मंदिरों के परिसर में आयोजित किया गया। राजावयल, वडामालपुरम और गुरुकालैयापट्टी गांवों ने मिलकर इस आयोजन की जिम्मेदारी संभाली। ग्रामीणों और पर्यटकों की मौजूदगी से पूरा इलाका उत्सवमय नजर आया।

सदियों पुरानी परंपरा
जल्लीकट्टू तमिलनाडु का पारंपरिक खेल है, जिसे पोंगल के तीसरे दिन खेला जाता है। इसका नाम तमिल शब्दों ‘जल्ली’ (सोने-चांदी के सिक्के) और ‘कट्टू’ (बंधा हुआ) से मिलकर बना है। प्रतियोगिता में बैल के सींगों से बंधे सिक्कों को निकालने की कोशिश की जाती है।
बैलों की खास नस्ल और खेल की शैली
इस खेल में प्रतिभागी बैल के कूबड़ को पकड़कर उसे काबू में करने की कोशिश करते हैं, जबकि कुछ उसके साथ दौड़ भी लगाते हैं। आमतौर पर पुलिकुलम और कंगायम नस्ल के बैलों का इस्तेमाल किया जाता है। विजेता बैलों की बाजार में खास मांग रहती है और उनकी कीमत भी अधिक होती है।
विजेताओं के लिए सरकारी नौकरी का ऐलान
इस बीच, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने जल्लीकट्टू को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक जल्लीकट्टू प्रतियोगिता में सबसे ज्यादा बैलों को वश में करने वाले व्यक्ति को पशुपालन विभाग में उपयुक्त सरकारी नौकरी दी जाएगी।






