IRCTC रेलगाड़ी…छुक-छुक से 180KM/h स्पीड, सामान्य कोच से लग्जरी वंदेभारत तक; जानिए 173 साल में कितनी बदली ट्रेन

IRCTC आज 173 साल की हो चुकी है, लेकिन तकनीक, रफ्तार और सुविधाओं के मामले में यह पहले से कहीं ज्यादा आधुनिक और युवा नजर आती है। कभी कोयले की आग में धधकती भाप इंजन वाली ट्रेन आज बिजली से चलने वाली हाई-स्पीड और लग्जरी ट्रेनों में

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Saturday, January 31, 2026

IRCTC

IRCTC आज 173 साल की हो चुकी है, लेकिन तकनीक, रफ्तार और सुविधाओं के मामले में यह पहले से कहीं ज्यादा आधुनिक और युवा नजर आती है। कभी कोयले की आग में धधकती भाप इंजन वाली ट्रेन आज बिजली से चलने वाली हाई-स्पीड और लग्जरी ट्रेनों में बदल चुकी है।

जहां कभी ट्रेन की पहचान “छुक-छुक” की आवाज और काले धुएं से होती थी, वहीं आज वही रेल 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से फर्राटा भर रही है और यात्रियों को आरामदायक, सुरक्षित और तेज सफर का अनुभव दे रही है।

IRCTC :भाप इंजन से हुई थी भारतीय रेल की शुरुआत

IRCTC का सफर 16 अप्रैल 1853 को शुरू हुआ था, जब मुंबई से ठाणे के बीच पहली ट्रेन चली। यह ट्रेन भाप इंजन से चलती थी और कोयले की आग में धधकते इंजन से निकलने वाला काला धुआं उस दौर की पहचान था।

धीरे-धीरे रेल देश की लाइफलाइन बन गई। गांवों से शहर, किसान से व्यापारी और छात्र से नौकरीपेशा—हर वर्ग के लिए रेल सबसे सस्ता और भरोसेमंद साधन बनी।
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डीजल और बिजली का दौर: बदलाव की शुरुआत

समय के साथ तकनीक बदली और भाप इंजन की जगह डीजल इंजन ने ले ली। इससे ट्रेनों की क्षमता बढ़ी और संचालन अधिक विश्वसनीय हुआ।

इसके बाद आया इलेक्ट्रिफिकेशन का दौर, जिसने भारतीय रेल की तस्वीर ही बदल दी।

  • ट्रेनों की रफ्तार बढ़ी

  • प्रदूषण में कमी आई

  • परिचालन लागत घटी

आज भारतीय रेल नेटवर्क का बड़ा हिस्सा बिजली से संचालित हो चुका है।

हाई-स्पीड और वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें

21वीं सदी में भारतीय रेल ने खुद को पूरी तरह बदलने की ठान ली। वंदे भारत एक्सप्रेस, तेजस, राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनों ने यात्रियों को नया अनुभव दिया।

इन ट्रेनों में—

  • आरामदायक सीटें

  • आधुनिक इंटीरियर

  • वाई-फाई और इंफोटेनमेंट

  • बेहतर सुरक्षा

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