Human Rights Activists News Agency के अनुसार, ईरान में जारी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच न्यायपालिका ने सख्त चेतावनी दी है। देश के न्यायपालिका प्रमुख घोलमहोसिन मोहसेनी-एजेई ने कहा है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा और उन्हें जल्द सजा दी जाएगी। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब मानवाधिकार संगठनों ने चेताया है कि गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को फांसी दी जा सकती है।
Human Rights Activists News Agency का दावा: हिंसा में 2,500 से ज्यादा मौतें
अमेरिका स्थित Human Rights Activists News Agency के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 2,571 लोगों की मौत हो चुकी है। बताया गया है कि यह संख्या दशकों में किसी भी ईरानी आंदोलन के दौरान सबसे ज्यादा है।मरने वालों में बड़ी संख्या आम प्रदर्शनकारियों की बताई जा रही है, जिनमें बच्चे और गैर-प्रदर्शनकारी नागरिक भी शामिल हैं।

हालिया युद्ध की पृष्ठभूमि
ईरान में यह हालात ऐसे समय बने हैं, जब कुछ महीने पहले इजराइल के साथ 12 दिन तक चला संघर्ष खत्म हुआ था। उस दौरान ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमले किए गए थे, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया।
अमेरिका और ट्रंप की चेतावनी
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाया गया तो अमेरिका कड़ी प्रतिक्रिया दे सकता है। उन्होंने फांसी की खबरों को “गंभीर परिणाम” वाला कदम बताया।
सुरक्षा बलों का सामूहिक अंतिम संस्कार
बुधवार को ईरान ने प्रदर्शनों में मारे गए 100 सुरक्षा कर्मियों के सामूहिक अंतिम संस्कार की तैयारी की। हालांकि कई इलाकों में दंगा-रोधी बलों को बैरकों में वापस भेज दिया गया, फिर भी सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मी गश्त करते दिखे।
आम लोगों में डर का माहौल
तेहरान की एक मां ने बताया कि गोलीबारी और हिंसा से लोग डरे हुए हैं। स्कूल बंद हैं और माता-पिता बच्चों को बाहर भेजने से घबरा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि प्रदर्शन जल्द ही युद्ध जैसे हालात में बदल गया।
इंटरनेट पाबंदियों के बीच Starlink की एंट्री
एक्टिविस्ट्स का दावा है कि Starlink सैटेलाइट इंटरनेट ईरान में मुफ्त सेवा दे रहा है, जिससे लोग सरकारी इंटरनेट बंदी से बच पा रहे हैं। हालांकि अधिकारी कथित तौर पर सैटेलाइट डिश की तलाश में छापे भी मार रहे हैं।
हिरासत और संचार संकट
मानवाधिकार समूहों के मुताबिक, अब तक 18,100 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए जा चुके हैं। संचार सेवाओं पर पाबंदियों के चलते हालात की स्वतंत्र पुष्टि करना मुश्किल बना हुआ है।






