Economic Survey 2026 : ‘सुपरपावर’ बनने की ओर भारत, FY27 में 6.8% से 7.2% की रफ्तार से दौड़ेगी इकोनॉमी

संसद के बजट सत्र के दूसरे दिन, यानी 29 जनवरी, केंद्र सरकार ने Economic Survey 2026 सदन के पटल पर रखा। यह सर्वेक्षण देश की आर्थिक सेहत का सबसे अहम आधिकारिक दस्तावेज माना जाता है, जो बीते एक वर्ष की आर्थिक प्रगति का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत करता

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Thursday, January 29, 2026

Economic Survey 2026

संसद के बजट सत्र के दूसरे दिन, यानी 29 जनवरी, केंद्र सरकार ने Economic Survey 2026 सदन के पटल पर रखा। यह सर्वेक्षण देश की आर्थिक सेहत का सबसे अहम आधिकारिक दस्तावेज माना जाता है, जो बीते एक वर्ष की आर्थिक प्रगति का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है।
हर साल केंद्रीय बजट से पहले आने वाला यह दस्तावेज न केवल सरकार के आर्थिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, बल्कि आगामी बजट की प्राथमिकताओं का संकेत भी देता है।

Economic Survey 2026 क्या है इसका महत्व?

आर्थिक सर्वेक्षण को सरल भाषा में देश की ‘आर्थिक बैलेंस शीट’ कहा जा सकता है। इसमें यह बताया जाता है कि देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ रही है, किन क्षेत्रों में मजबूती है और कहां सुधार की जरूरत है।Economic Survey 2026 यह रिपोर्ट नीति-निर्माताओं, निवेशकों, उद्योग जगत और आम नागरिकों—सभी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
Economic Survey 2026

GDP ग्रोथ पर क्या कहता है सर्वे?

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर पर विशेष ध्यान दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और व्यापारिक दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने स्थिर और संतुलित विकास दर्ज किया है।
सरकार का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, बुनियादी ढांचे में निवेश और सुधारों के कारण भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है।

महंगाई और मौद्रिक स्थिरता का आकलन

सर्वेक्षण में मुद्रास्फीति (Inflation) को लेकर भी विस्तृत विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य और ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार और रिजर्व बैंक के समन्वित प्रयासों से महंगाई को काफी हद तक नियंत्रण में रखा गया।
मौद्रिक नीति और राजकोषीय अनुशासन ने आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।

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