आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब हर सेक्टर में तेजी से बढ़ रहा है और हेल्थ सेक्टर भी इससे अछूता नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री Anupriya Patel ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में AI अब समय की मांग बन चुका है।
Anupriya Patel ने कहा डॉक्टरों की जगह नहीं, क्षमता बढ़ाने का जरिया
Anupriya Patel ने साफ किया कि AI का उद्देश्य डॉक्टरों को बदलना नहीं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना है। इससे डॉक्टर कम समय में ज्यादा सटीक और बेहतर इलाज कर सकेंगे।यह बयान उन्होंने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) द्वारा तैयार मेडिकल एजुकेशन में AI आधारित ऑनलाइन ट्रेनिंग प्रोग्राम के लॉन्च के दौरान दिया।

50,000 डॉक्टरों को AI की ट्रेनिंग
इस ऑनलाइन प्रोग्राम का लक्ष्य देशभर के करीब 50,000 डॉक्टरों को AI की बुनियादी समझ देना है। इसमें क्लीनिकल प्रैक्टिस, बीमारी की पहचान, इलाज के फैसले, रिसर्च और मेडिकल एजुकेशन में AI के इस्तेमाल को सरल भाषा में समझाया जाएगा।केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस पहल को शानदार प्रतिक्रिया मिली है और अब तक 42,000 से अधिक डॉक्टर इसमें रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं।
गैर-संचारी रोगों से निपटने में मदद
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत में गैर-संचारी रोगों का बढ़ता बोझ और टीबी जैसी बीमारियां बड़ी चुनौती हैं। ऐसे AI आधारित ट्रेनिंग प्रोग्राम स्वास्थ्य सेवाओं को रिएक्टिव से प्रोएक्टिव और प्रिवेंटिव बनाने में मदद करेंगे।स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि यह ट्रेनिंग प्रोग्राम डॉक्टरों की डिजिटल क्षमता बढ़ाने और मेडिकल एजुकेशन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।






