Al in Agriculture जलवायु-सहिष्णु और टिकाऊ खेती की नई दिशा

Al in Agricultureरोबोटिक्स और स्वचालन का बढ़ता प्रभाव World Economic Forum (WEF) ने अपनी रिपोर्ट Shaping the Deep‑Tech Revolution in Agriculture में बताया है कि कृषि क्षेत्र अब सिर्फ परम्परागत तरीकों तक सीमित नहीं रहेगा। इस रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादकता, सहनशीलता तथा स्थिरता को बढ़ावा देने के

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Saturday, November 8, 2025

Al in Agriculture

Al in Agricultureरोबोटिक्स और स्वचालन का बढ़ता प्रभाव

World Economic Forum (WEF) ने अपनी रिपोर्ट Shaping the Deep‑Tech Revolution in Agriculture में बताया है कि कृषि क्षेत्र अब सिर्फ परम्परागत तरीकों तक सीमित नहीं रहेगा। इस रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादकता, सहनशीलता तथा स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सात प्रमुख
डीप-टेक (deep-tech) तकनीकें जैसे जनरेटिव एआई, रोबोटिक्स, कंप्यूटर विजन, एज आईओटी, जीनोम एडिटिंग (CRISPR), नैनोटेक्नोलॉजी और उपग्रह-सेंसर आधारित दूर-अवलोकन खास भूमिका निभा सकती हैं। रिपोर्ट में भारत से कुछ केस स्टडीज का हवाला दिया गया है, जो दिखाती हैं कि इन तकनीकों का असर धीमे लेकिन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।Al in Agriculture

AI in Agriculture जलवायु-सहिष्णु धान की नई दिशा

Artificial Intelligence (AI) का उपयोग कृषि में तेजी से बढ़ रहा है जिससे भारतीय कृषि अनुसंधान में नई दिशा मिल रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित जल-सहिष्णु धान किस्मों में अब AI और CRISPR आधारित जीनोम एडिटिंग तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इन तकनीकों की सहायता से ऐसी धान प्रजातियाँ तैयार की गई हैं जो सूखा, लवण-प्रदूषित मिट्टी और जलभराव जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन दे सकती हैं। AI आधारित डेटा विश्लेषण से वैज्ञानिक मौसम, मिट्टी की गुणवत्ता और फसल वृद्धि के पैटर्न को समझकर अधिक सटीक सुधार कर पा रहे हैं जिससे उत्पादन में वृद्धि और उत्सर्जन में कमी संभव हो रही है।

Al in Agriculture क्यों यह जरूरी है?

कृषि क्षेत्र आज कई चुनौतियों से घिरा है जलवायु-चरम, अर्बन माइग्रेशन, प्राकृतिक संसाधनों का क्षय आदि। WEF ने कहा है कि इन चुनौतियों का सामना करने में इन डीप-टेक तकनीकों का आवश्यक योगदान हो सकता है। भारत जैसे देश में जहाँ छोटे और सीमांत खेत अक्सर विविध जोखिमों से प्रभावित होते हैं इन तकनीकों से लागत-प्रभावी, डेटा-आधारित और अधिक टिकाऊ Farming मॉडल विकसित हो सकेगा।

कृषि में AI की नई दिशा

हालाँकि पायलट स्तर पर तकनीकी प्रयोग संपन्न हो रहे हैं पर बड़े पैमाने पर बदलाव के लिए चुनौतियाँ भी हैं जैसे निवेश की जरूरत, किसानों का प्रशिक्षण, डिजिटल-इंफ्रास्ट्रक्चर, और भाषा-विविधता में समावेश। WEF रिपोर्ट में भारत के बहुभाषी AI प्लेटफॉर्म Bhashini का उदाहरण दिया गया है जो ग्रामीण भारत में AI तकनीकों के पहुँच को आसान बना रहा है। आगे विकास के लिए यह जरूरी है कि नीति-निर्माता, प्रौद्योगिकी विक्रेता, कृषि वैज्ञानिक और किसान मिलकर इस बदलाव-यात्रा को आगे बढ़ाए।

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