Arijit Singh के प्लेबैक सिंगिग छोड़ने के बाद, ‘इंडियन आइडल 1’ के विजेता का शॉकिंग खुलासा, बोले- सिंगर्स को…

मशहूर गायक Arijit Singh ने 27 जनवरी को जब प्लेबैक सिंगिंग से रिटायर होने का ऐलान किया, तो फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री में हलचल मच गई। उनके इस फैसले से न सिर्फ फैन्स हैरान रह गए, बल्कि कई म्यूजिक कंपोजर, फिल्ममेकर और इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Thursday, February 5, 2026

Arijit Singh

मशहूर गायक Arijit Singh ने 27 जनवरी को जब प्लेबैक सिंगिंग से रिटायर होने का ऐलान किया, तो फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री में हलचल मच गई। उनके इस फैसले से न सिर्फ फैन्स हैरान रह गए, बल्कि कई म्यूजिक कंपोजर, फिल्ममेकर और इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी चौंक गए।

अरिजीत सिंह मौजूदा दौर के सबसे सफल और लोकप्रिय प्लेबैक सिंगर्स में गिने जाते हैं। ऐसे में उनका अचानक लिया गया यह फैसला कई सवाल खड़े करता है—क्या भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री सिंगर्स के लिए उतनी सुरक्षित और सम्मानजनक है, जितनी बाहर से दिखाई देती है?

Arijit Singh के बाद इंडस्ट्री की सच्चाई पर चर्चा

Arijit Singh के रिटायरमेंट की खबर के बीच, इंडियन आइडल सीजन 1 के विजेता और मशहूर सिंगर अभिजीत सावंत ने इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री की कुछ कड़वी सच्चाइयों पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि प्लेबैक सिंगर्स को अक्सर कम पैसे दिए जाते हैं और कई मामलों में उनका शोषण भी होता है।

अभिजीत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अरिजीत के फैसले को लेकर इंडस्ट्री में पहले ही बहस तेज हो चुकी है।
Arijit Singh

यूट्यूब इंटरव्यू में किया बड़ा खुलासा

एक यूट्यूबर को दिए गए इंटरव्यू में अभिजीत सावंत Arijit Singh ने भारतीय संगीत जगत की अंदरूनी चुनौतियों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत में सिंगर्स को सिर्फ आवाज़ देने वाला कलाकार माना जाता है, जबकि उनकी मेहनत और योगदान को सही मायनों में पहचान नहीं मिलती।

अभिजीत ने बताया कि इंडस्ट्री में यह धारणा बनी हुई है कि सिंगर्स को फिल्मों से ज्यादा लोकप्रिय नहीं होना चाहिए। इसी वजह से उन्हें एक तय रकम देकर उनकी ग्रोथ को सीमित रखा जाता है।

“सिंगर्स को फिल्म से बड़ा नहीं बनने दिया जाता”

अभिजीत सावंत ने इंटरव्यू में कहा,
“लोग नहीं चाहते कि सिंगर्स फिल्म से ज्यादा पॉपुलर हों। इसलिए उन्हें एक फिक्स्ड अमाउंट दे दिया जाता है। उनका नाम चलता है, आवाज़ चलती है, लेकिन आर्थिक रूप से उन्हें उतना मजबूत नहीं किया जाता।”

उन्होंने आगे कहा कि फिल्म म्यूजिक इंडस्ट्री में आज भी सिंगर्स को वह सम्मान और अधिकार नहीं मिलता, जो उन्हें मिलना चाहिए।

रॉयल्टी सिस्टम पर उठाए सवाल

अभिजीत ने भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री में रॉयल्टी सिस्टम की कमी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि भारत में प्लेबैक सिंगर्स और म्यूजिशियंस को फिल्मों के गानों पर नियमित रॉयल्टी नहीं मिलती।

उन्होंने कहा,
“म्यूजिशियन और सिंगर्स को आज भी फिल्म म्यूजिक के लिए रॉयल्टी नहीं दी जाती। जबकि पश्चिमी देशों में यह एक सामान्य और मजबूत सिस्टम है।”

विदेशी उदाहरण देकर समझाई हकीकत

अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए अभिजीत सावंत ने म्यूजिक कंपोजर बिद्दू का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि बिद्दू ने ‘लफ्जों में’ जैसे लोकप्रिय गानों पर काम किया है और पश्चिम में भी उनके कुछ गाने रिलीज़ हुए हैं।

अभिजीत के अनुसार,
“बिद्दू को विदेश में किए गए सिर्फ दो गानों से इतनी रॉयल्टी मिलती है कि वे उस पैसे से पूरी जिंदगी आराम से गुजार सकते हैं। वहीं भारत में हमें अपनी रोज़ी-रोटी चलाने के लिए भी उतने पैसे नहीं मिलते।”

मेहनत और कमाई के बीच बड़ा अंतर

अभिजीत ने यह भी कहा कि भारतीय सिंगर्स की मेहनत और उनकी कमाई के बीच बहुत बड़ा अंतर है। एक गाना रिकॉर्ड करने से लेकर उसे हिट बनाने तक सिंगर की भूमिका अहम होती है, लेकिन जब कमाई की बात आती है, तो उनका हिस्सा बहुत सीमित रह जाता है।

उन्होंने यह संकेत भी दिया कि इसी तरह की परिस्थितियां बड़े सिंगर्स को भी निराश कर सकती हैं, और संभव है कि अरिजीत सिंह के फैसले के पीछे भी ऐसे ही कारण हों।

अरिजीत के फैसले से जुड़े सवाल

हालांकि अरिजीत सिंह ने अपने रिटायरमेंट के पीछे के कारणों पर विस्तार से कुछ नहीं कहा है, लेकिन अभिजीत सावंत के बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई है कि क्या भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री सिंगर्स के लिए लंबे समय तक टिकाऊ करियर प्रदान कर पा रही है।

कई फैन्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर रॉयल्टी, पारदर्शी कॉन्ट्रैक्ट और सिंगर्स के अधिकारों पर गंभीरता से काम नहीं किया गया, तो आगे और भी बड़े कलाकार ऐसे फैसले ले सकते हैं।

इंडस्ट्री में सुधार की जरूरत

अभिजीत सावंत के अनुसार, भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री को अब समय के साथ बदलने की जरूरत है। सिंगर्स और म्यूजिशियंस को केवल आवाज़ देने वाला कलाकार नहीं, बल्कि क्रिएटिव पार्टनर के तौर पर देखा जाना चाहिए।

उनका कहना है कि जब तक सिंगर्स को आर्थिक सुरक्षा, रॉयल्टी और सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक यह असंतोष बना रहेगा।

यह भी पढ़े