पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज होती जा रही है। इसी बीच वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। अदालत में आज इस मामले की अहम सुनवाई होनी है, जिसे लेकर राज्य की राजनीति में हलचल साफ नजर आ रही है।
SIR मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में
सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से जुड़े मामले पर सुनवाई की जा रही है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस ने भी सवाल खड़े किए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आरोप है कि SIR वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण की आड़ में लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित किया जा सकता है। इसी चिंता को लेकर उन्होंने खुद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

अभिषेक बनर्जी के आवास से रवाना हुईं ममता
सुनवाई से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास से सुप्रीम कोर्ट के लिए रवाना हुईं। उनके साथ पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कानूनी सलाहकार भी मौजूद रहे। इस घटनाक्रम को 2026 के चुनावी परिदृश्य से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि वोटर लिस्ट किसी भी चुनाव की सबसे अहम कड़ी मानी जाती है।
अदालत परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
ममता बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट में मौजूदगी को देखते हुए अदालत परिसर और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।
तमिलनाडु के मामले का भी जिक्र
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से जुड़े एक मामले में अहम निर्देश दिए थे। अदालत ने चुनाव आयोग से कहा था कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ कैटेगरी में आने वाले मतदाताओं की सूची सार्वजनिक की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इसी आदेश के बाद विभिन्न राज्यों में चल रहे SIR प्रोसेस पर सवाल उठने लगे हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण में चुनाव आयोग को पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए। उनका आरोप है कि अगर प्रक्रिया स्पष्ट नहीं हुई तो बड़ी संख्या में वैध मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। ममता बनर्जी भी इसी आशंका को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं।
खुद बहस करने की अनुमति मांग सकती हैं ममता
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अदालत से खुद अपना पक्ष रखने और बहस करने की अनुमति मांगी है। अगर उन्हें यह इजाजत मिलती है, तो यह एक असामान्य लेकिन राजनीतिक रूप से बेहद अहम घटनाक्रम होगा। इससे यह संदेश भी जाएगा कि तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रही है।
2026 चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि वोटर लिस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही यह सुनवाई 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक संकेत है। ममता बनर्जी इसे केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा से जुड़ा मुद्दा बता रही हैं। आने वाले दिनों में अदालत का रुख और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकती है।





