“मैं बिहारी हूं… क्या यही मेरा गुनाह है?”: बक्सर Ethanol Plant के मालिक का वीडियो, सरकार पर उठे गंभीर सवाल

बक्सर बिहार में इथेनॉल उत्पादन (Ethanol Plant)को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बक्सर जिले के नवानगर क्षेत्र में संचालित एक इथेनॉल प्लांट के मालिक और प्रबंधन प्रमुख अजय कुमार सिंह ने हाल ही में एक सार्वजनिक

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Wednesday, February 4, 2026

Ethanol Plant

बक्सर
बिहार में इथेनॉल उत्पादन (Ethanol Plant)को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बक्सर जिले के नवानगर क्षेत्र में संचालित एक इथेनॉल प्लांट के मालिक और प्रबंधन प्रमुख अजय कुमार सिंह ने हाल ही में एक सार्वजनिक संदेश के माध्यम से अपनी चिंता जाहिर की है। अजय कुमार सिंह का कहना है कि इथेनॉल नीति के तहत सरकार की ओर से निवेश के लिए प्रोत्साहित किया गया था, जिसके बाद बड़ी पूंजी लगाकर यह प्लांट स्थापित किया गया। हालांकि, वर्तमान में उत्पादित इथेनॉल की खरीद को लेकर स्पष्टता नहीं होने से संचालन प्रभावित हो रहा है।

Ethanol Plant और खरीद प्रक्रिया को लेकर असमंजस

प्लांट प्रबंधन के अनुसार, उत्पादन क्षमता के अनुरूप इथेनॉल तैयार किया जा रहा है, लेकिन खरीद व्यवस्था सुचारु न होने के कारण स्टॉक जमा हो रहा है। उनका दावा है कि इस स्थिति का सामना केवल बक्सर ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में स्थापित कुछ इथेनॉल प्लांट (Ethanol Plant) भी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निवेश से पहले जिन शर्तों और आश्वासनों की बात की गई थी, वर्तमान स्थिति उनसे अलग नजर आ रही है।

रोजगार और आर्थिक स्थिरता पर असर

नवानगर स्थित इस इथेनॉल प्लांट (Ethanol Plant) से सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है। प्लांट प्रबंधन का कहना है कि यदि उत्पादन और खरीद की प्रक्रिया में स्थिरता नहीं आई, तो इसका असर न केवल उद्योग पर बल्कि इससे जुड़े कर्मचारियों और उनके परिवारों पर भी पड़ सकता है। इसके साथ ही, बिहार में नियमों की वजह से प्लांट (Ethanol Plant) को किसी अन्य वैकल्पिक उत्पादन में परिवर्तित करना भी संभव नहीं बताया जा रहा है।
Ethanol Plant

निवेश माहौल पर उठते प्रश्न

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सरकारी नीतियों और जमीनी क्रियान्वयन के बीच तालमेल नहीं रहा, तो इसका प्रभाव राज्य के निवेश माहौल पर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए नीति की निरंतरता और भरोसेमंद व्यवस्था अहम मानी जाती है।

इस मामले में प्लांट प्रबंधन ने केंद्र और राज्य स्तर पर स्थिति स्पष्ट करने और समाधान निकालने की अपील की है।

सार्वजनिक प्रतिक्रिया और चर्चा

इस मुद्दे के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और औद्योगिक हलकों में इस पर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों ने इसे बिहार में औद्योगिक परियोजनाओं के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों से जोड़कर देखा है। हालांकि, अब तक इस विषय पर सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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