संसद के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। Rahul Gandhi मंगलवार को यह टकराव उस समय और स्पष्ट हो गया, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लगातार दूसरे दिन भी सदन में अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला। इस मुद्दे पर केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि लगभग सभी विपक्षी दल एक सुर में राहुल गांधी के समर्थन में खड़े नजर आए। विपक्ष का कहना है कि यह किसी एक नेता या पार्टी का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं और विपक्ष के संवैधानिक अधिकारों का सवाल है।
Rahul Gandhi किन मुद्दों पर अड़े रहे
Rahul Gandhi सदन में बोलने के दौरान चीन की सीमा पर कथित घुसपैठ, विवादित एपस्टीन फाइल्स और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते जैसे मुद्दे उठाने पर अड़े रहे। इन विषयों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी असहमति सामने आई। सत्ता पक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी नियमों के दायरे से बाहर जाकर संवेदनशील विषयों को उठा रहे हैं, जबकि विपक्ष का कहना है कि ये सभी मुद्दे राष्ट्रीय हित से जुड़े हैं और उन पर चर्चा जरूरी है।

सोमवार से शुरू हुआ गतिरोध
इस पूरे विवाद की शुरुआत सोमवार को हुई, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 28 जनवरी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी बोल रहे थे। अपने भाषण में उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अभी तक प्रकाशित न हुई किताब पर आधारित एक मैगजीन लेख का हवाला दिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 31 अगस्त 2020 को पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन की आक्रामकता के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्णय लेने में देरी की।






