आज पूरी दुनिया में World Cancer Day मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना, समय पर जांच को बढ़ावा देना और इलाज के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा करना है। भारत में भी कैंसर के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, तनाव और पर्यावरणीय कारणों को इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। ऐसे में जागरूकता और रोकथाम पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है।
World Cancer Day के भारत में क्यों बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले
World Cancer Day स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण हैं। धूम्रपान, शराब सेवन, जंक फूड, शारीरिक गतिविधि की कमी और देर से जांच इसकी प्रमुख वजहें हैं। हालांकि, समय पर सही इलाज और सकारात्मक जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी से लड़ना संभव है। इसी की एक मिसाल हैं पटना के बसंत कुमार, जिन्होंने कैंसर जैसी असाध्य बीमारी को हराकर एक नई जिंदगी शुरू की।

पटना के बसंत कुमार की प्रेरक कहानी
राजधानी पटना के एजी कॉलोनी में रहने वाले 62 वर्षीय बसंत कुमार आज उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने कैंसर को मात दी है। उनकी कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी बताती है कि सही सोच, संयम और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियां किस तरह जीवन बदल सकती हैं। बसंत कुमार का मानना है कि अगर मन मजबूत हो और जीवनशैली अनुशासित हो, तो कैंसर जैसी बीमारी पर भी विजय पाई जा सकती है।
18 साल पहले कैंसर ने हिला दी थी जिंदगी
आज से करीब 18 साल पहले बसंत कुमार के जीवन में अचानक भूचाल आ गया था। उन्हें पेट में लगातार दर्द और कमजोरी महसूस होने लगी। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उनकी छोटी आंत में कैंसर है। यह खबर पूरे परिवार के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। उस समय न केवल बीमारी गंभीर थी, बल्कि आर्थिक स्थिति भी इतनी मजबूत नहीं थी कि महंगे इलाज का खर्च उठाया जा सके।
आर्थिक तंगी और मानसिक संघर्ष
कैंसर का नाम सुनते ही परिवार की चिंताएं और बढ़ गईं। इलाज के खर्च, दवाइयों और भविष्य की अनिश्चितता ने बसंत कुमार और उनके परिजनों को मानसिक रूप से तोड़ दिया। हालांकि, उन्होंने हार मानने के बजाय विकल्पों की तलाश शुरू की। इसी दौरान उन्हें आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के बारे में जानकारी मिली, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
आयुर्वेदिक उपचार की ओर रुख
बसंत कुमार ने एलोपैथिक इलाज के साथ-साथ आयुर्वेदिक उपचार अपनाने का फैसला किया। आयुर्वेदिक चिकित्सकों की सलाह पर उन्होंने अपनी जीवनशैली में बड़े बदलाव किए। सात्विक भोजन, नियमित दिनचर्या, योग और प्राणायाम को उन्होंने अपने जीवन का हिस्सा बना लिया। उनका कहना है कि आयुर्वेद केवल दवाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा का संतुलन सिखाता है।
संयमित जीवनशैली बनी जीत की कुंजी
बसंत कुमार के अनुसार, कैंसर से लड़ाई में संयमित जीवनशैली ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने तला-भुना और बाहर का खाना पूरी तरह छोड़ दिया। समय पर भोजन, पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गई। इसके साथ ही सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।
धीरे-धीरे मिली राहत और नई उम्मीद
लगातार आयुर्वेदिक उपचार और अनुशासित जीवनशैली का असर धीरे-धीरे दिखने लगा। स्वास्थ्य में सुधार हुआ और जांच रिपोर्ट्स भी बेहतर आने लगीं। कुछ वर्षों के भीतर बसंत कुमार की हालत स्थिर हो गई और डॉक्टरों ने कैंसर के नियंत्रण में होने की पुष्टि की। यह उनके और उनके परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था।






