उत्तराखंड के कोटद्वार शहर में हाल ही में घटी एक घटना ने सोशल मीडिया से लेकर आम जनचर्चा तक को झकझोर कर रख दिया है। Muhammad Deepak का यह मामला सिर्फ एक दुकान के नाम या पहचान का नहीं, बल्कि उस सोच का है जो समाज को बांटने की कोशिश करती है। इसी बीच एक आम नागरिक की असाधारण हिम्मत ने यह साबित कर दिया कि नफरत के शोर में भी इंसानियत की आवाज बुलंद हो सकती है।
यह घटना उस समय सामने आई जब कोटद्वार के एक व्यस्त बाजार में स्थित एक मुस्लिम दुकानदार को कथित तौर पर डराने और घेरने की कोशिश की गई। इस माहौल तनावपूर्ण होता जा रहा था, लेकिन तभी एक स्थानीय युवक के एक वाक्य ने पूरी तस्वीर बदल दी—
“मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।”
Muhammad Deepak की वजह से दशकों पुरानी दुकान और अचानक उठा विवाद
कोटद्वार में स्थित “बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर” नाम की यह दुकान शोएब अहमद और उनका परिवार कई दशकों से चला रहा है। यह दुकान इलाके में एक भरोसेमंद नाम रही है, जहां से पीढ़ियों से लोग अपने बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस और अन्य जरूरी सामान खरीदते आए हैं।
Muhammad Deepak स्थानीय लोगों के अनुसार, इस दुकान का नाम वर्षों से वही है और कभी इस पर कोई विवाद नहीं हुआ। लेकिन हाल के दिनों में अचानक यह दुकान चर्चा में आ गई, जब कथित तौर पर एक दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े कुछ युवाओं ने दुकान के नाम में इस्तेमाल हुए “बाबा” शब्द पर आपत्ति जताई।उनका तर्क था कि एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान का नाम ऐसा नहीं होना चाहिए, जो किसी धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा प्रतीत हो। यही आपत्ति धीरे-धीरे दबाव और डराने की कोशिश में बदल गई।

बाजार में बढ़ता तनाव और घिरता दुकानदार
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवाओं के एक समूह ने दुकानदार से सवाल-जवाब शुरू किए और माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गया। दुकानदार और उनके परिवार के लिए यह स्थिति डराने वाली थी। आसपास मौजूद लोग भी असमंजस में थे कि मामला किस दिशा में जाएगा।
ऐसे समय में अक्सर लोग चुप रहना ही सुरक्षित समझते हैं, लेकिन कोटद्वार में उस दिन एक युवक ने चुप्पी तोड़ने का फैसला किया।
“मेरा नाम मोहम्मद दीपक है”—एक वाक्य, बड़ा संदेश
जब माहौल गर्म होता जा रहा था, तभी एक स्थानीय युवक बीच में आया और उसने बेहद शांत लेकिन मजबूत आवाज में कहा—
“मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।”






