विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अमेरिका के बाहर निकलने के फैसले ने वैश्विक स्वास्थ्य नीति में एक नए और चुनौतीपूर्ण दौर की शुरुआत कर दी है। यह निर्णय केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभाव दुनिया के लगभग हर देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों पर पड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से जहां अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सहयोग कमजोर होगा, वहीं अमेरिका को भी लंबे समय में इसके नकारात्मक परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।
WHO से ट्रंप प्रशासन की दलीलें क्या हैं?
WHO में अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के लिए अमेरिका का वित्तीय योगदान अन्य देशों की तुलना में अत्यधिक है। व्हाइट हाउस के अनुसार, चीन की जनसंख्या अमेरिका से लगभग तीन गुना अधिक होने के बावजूद उसका योगदान अमेरिका के मुकाबले करीब 90 प्रतिशत कम है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यह वित्तीय असंतुलन अमेरिका के हितों के खिलाफ है और उसे अपने संसाधनों का इस्तेमाल घरेलू प्राथमिकताओं के लिए करना चाहिए।

कोविड-19 को लेकर डब्ल्यूएचओ पर आरोप
ट्रंप प्रशासन ने डब्ल्यूएचओ पर कोविड-19 महामारी के दौरान कमजोर प्रतिक्रिया देने का आरोप भी लगाया है। अमेरिका का कहना है कि महामारी के शुरुआती दौर में संगठन समय पर सख्त कदम उठाने में विफल रहा, जिससे वायरस वैश्विक स्तर पर फैल गया। इसके साथ ही संगठन पर पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के आरोप भी लगाए गए हैं।






