भारतीय सिनेमा में Madhur Bhandarkar का नाम उन निर्देशकों में शुमार है, जिन्होंने ग्लैमर के पीछे छिपे कड़वे सच को बड़े पर्दे पर बेबाकी से दिखाया। ‘चांदनी बार’, ‘पेज 3’, ‘फैशन’ और ‘ट्रैफिक सिग्नल’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने समाज के उन पहलुओं को सामने रखा, जिन पर अक्सर बात करने से कतराया जाता है। उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत यही रही है कि वे मनोरंजन के साथ-साथ दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती हैं।
Madhur Bhandarkar की भारत रंग महोत्सव में खास मौजूदगी
दिल्ली के मंडी हाउस स्थित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में आयोजित हो रहे दुनिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय थिएटर फेस्टिवल ‘भारत रंग महोत्सव’ में इस बार भी कला और संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला। देश-विदेश के दिग्गज रंगकर्मी, नाट्य निर्देशक और कलाकार इस महोत्सव का हिस्सा बने। इसी कड़ी में मशहूर फिल्म निर्देशक Madhur Bhandarkar की मौजूदगी ने आयोजन की शोभा और बढ़ा दी।

थिएटर से जुड़ाव पर क्या बोले मधुर भंडारकर
बतौर विशेष अतिथि भारत रंग महोत्सव पहुंचे मधुर भंडारकर ने कहा कि थिएटर उनकी रचनात्मक सोच की नींव रहा है। उनके मुताबिक, “नाट्यमंच कलाकार को अनुशासन, धैर्य और गहराई सिखाता है। थिएटर में अभिनय करना आसान नहीं होता, क्योंकि वहां हर भावना लाइव होती है और गलती सुधारने का मौका नहीं मिलता।”
उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में भी थिएटर की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। बल्कि थिएटर से निकलकर आने वाले कलाकारों में अभिनय की समझ ज्यादा गहरी होती है।






