इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा है कि आने वाला इंडियाAI इम्पैक्ट समिट अब दुनिया का अपनी तरह का सबसे बड़ा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सम्मेलन बनता जा रहा है। मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि इस समिट को दुनिया भर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है, जो भारत के बढ़ते AI प्रभाव को दर्शाती है।
मंत्री के अनुसार, इस वैश्विक मंच में करीब 100 देशों की भागीदारी की उम्मीद है। इनमें से 15 राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों की मौजूदगी पहले ही पक्की हो चुकी है। यह भारत के लिए न केवल तकनीकी बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
Ashwini Vaishnaw ने कहा कि ग्लोबल इंडस्ट्री की मजबूत मौजूदगी
सरकारी भागीदारी के साथ-साथ निजी क्षेत्र से भी इस समिट को व्यापक समर्थन मिल रहा है। Ashwini Vaishnaw ने बताया कि 100 से अधिक वैश्विक CEO इस AI समिट में हिस्सा लेने की तैयारी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि दुनिया की बड़ी टेक और इंडस्ट्रियल कंपनियां भारत को केवल एक मार्केट के रूप में नहीं, बल्कि AI इनोवेशन के केंद्र के रूप में देख रही हैं। इंडस्ट्री लीडर्स की मौजूदगी से AI में निवेश, साझेदारी और रिसर्च के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री की AI स्टेकहोल्डर्स से अहम बातचीत
केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI वैल्यू चेन से जुड़े प्रमुख स्टेकहोल्डर्स से बातचीत की। इस बैठक में AI मॉडल डेवलपर्स, एप्लिकेशन बिल्डर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स शामिल थे।
वैष्णव के मुताबिक, इस चर्चा से साफ पता चलता है कि भारत किस तरह से AI आर्किटेक्चर की सभी पांच लेयर्स पर एक साथ काम कर रहा है। उन्होंने खास तौर पर कहा कि एप्लिकेशन लेयर पर भारत की स्थिति बेहद मजबूत होकर उभर रही है।
AI आर्किटेक्चर की पांच लेयर्स में भारत की प्रगति
अश्विनी वैष्णव ने AI आर्किटेक्चर को समझाते हुए बताया कि इसमें पांच प्रमुख लेयर्स होती हैं—डेटा, मॉडल, कंप्यूट, इंफ्रास्ट्रक्चर और एप्लिकेशन।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से मिलने वाले डेवलपर्स ने जिस तरह से अपने काम को प्रस्तुत किया, वह बेहद उत्साहजनक था। भारत की IT इंडस्ट्री, जिसने दशकों तक पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में अपनी ताकत दिखाई, अब उसी क्षमता का इस्तेमाल AI-संचालित समाधानों के निर्माण में कर रही है।
उनके मुताबिक, यह बदलाव दिखाता है कि भारत केवल तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि नई तकनीक गढ़ने वाला देश बन रहा है।






