राजधानी दिल्ली में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) द्वारा आयोजित भारत रंग महोत्सव के अंतर्गत इस वर्ष एक खास पहल ने दर्शकों का ध्यान खींचा है। करीब 7 वर्षों के अंतराल के बाद ‘जश्न-ए-बचपन’ का दोबारा शुभारंभ किया गया है। यह आयोजन बाल रंगमंच को समर्पित है और बच्चों के भीतर छिपी रचनात्मकता, कल्पना और आत्मविश्वास को मंच देने का एक सशक्त प्रयास माना जा रहा है।
इससे पहले जश्न-ए-बचपन का आयोजन वर्ष 2018 में हुआ था। लंबे अंतराल के बाद इसकी वापसी ने बच्चों, अभिभावकों और रंगमंच से जुड़े कलाकारों में नया उत्साह भर दिया है।
NSD में 18 फरवरी तक 24 नाटकों का मंचन
NSD में इस वर्ष जश्न-ए-बचपन के तहत देशभर से आए युवा कलाकारों द्वारा 24 नाटकों का मंचन किया जाएगा। ये प्रस्तुतियां 18 फरवरी तक चलेंगी।
इन नाटकों में बच्चों द्वारा किए गए प्रदर्शन, बच्चों और वयस्कों की संयुक्त प्रस्तुतियां, और वयस्कों द्वारा बच्चों के लिए तैयार किए गए नाटक शामिल हैं। आयोजकों के अनुसार, इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बच्चों में सोचने, सवाल करने और संवेदनशील बनने की क्षमता को बढ़ावा देना है।

एनएसडी निदेशक ने जताई खुशी
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने जश्न-ए-बचपन की वापसी पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि लगभग सात वर्षों बाद इस आयोजन का भारत रंग महोत्सव का हिस्सा बनना एनएसडी के लिए गर्व का विषय है।
उनके अनुसार,
“जश्न-ए-बचपन केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह युवा मन और समाज के बीच एक रचनात्मक संवाद का माध्यम है, जो एक संवेदनशील और कल्पनाशील भविष्य की नींव रखता है।”
उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में जुटी एनएसडी की पूरी टीम को शुभकामनाएं भी दीं।






