नक्सलवाद को करारा झटका, Sukma में 4 इनामी माओवादियों का सरेंडर, पूना मारगेम अभियान से हुए प्रेरित

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित Sukma जिले से एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। दक्षिण बस्तर डिविजन के अंतर्गत कोंटा–किस्टाराम एरिया कमेटी में सक्रिय चार माओवादी कैडरों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। इनमें दो महिला माओवादी भी शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वाले इन

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Friday, January 30, 2026

Sukma

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित Sukma जिले से एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। दक्षिण बस्तर डिविजन के अंतर्गत कोंटा–किस्टाराम एरिया कमेटी में सक्रिय चार माओवादी कैडरों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। इनमें दो महिला माओवादी भी शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वाले इन सभी माओवादियों पर कुल 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था और ये कई आपराधिक मामलों में वांछित थे।

यह आत्मसमर्पण न केवल सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, बल्कि माओवादी संगठन के कमजोर होते ढांचे की भी साफ तस्वीर पेश करता है।

Sukma में ऑटोमैटिक हथियारों के साथ किया सरेंडर

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण Sukma में करने वाले माओवादी कैडरों ने SLR, INSAS, .303 और .315 बोर रायफल समेत गोला-बारूद भी जमा कराया है। सभी माओवादी लंबे समय से हिंसक गतिविधियों में शामिल थे और अलग-अलग हमलों व आपराधिक मामलों में आरोपी रहे हैं।
आत्मसमर्पित कैडर गोलापल्ली LOS कमांडर और पार्टी सदस्य रैंक के हैं, जो संगठनात्मक रूप से माओवादियों के लिए अहम माने जाते थे।
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‘पूना मारगेम’ अभियान से बदला रास्ता

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ये आत्मसमर्पण “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान से प्रेरित होकर किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य भटके हुए माओवादी कैडरों को हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर देना है।
चारों माओवादियों ने बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज और सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के समक्ष आत्मसमर्पण किया और छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत नया जीवन शुरू करने की इच्छा जताई।

सुरक्षा कैंप और सड़क कनेक्टिविटी का असर

पुलिस के मुताबिक, किस्टाराम और गोलापल्ली क्षेत्रों में हाल के वर्षों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सीधी सड़क कनेक्टिविटी और लगातार चलाए जा रहे प्रभावी नक्सल विरोधी अभियानों के कारण माओवादियों की गतिविधियां काफी सीमित हो गई हैं।

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