UGC के ‘काले कानून’ पर क्यों मचा इतना बवाल; क्या वाकई जनरल स्टूडेंट के साथ भेदभाव कर रहे नए नियम?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव की शिकायतों से निपटने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत अब किसी भी शिकायत पर 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक कार्रवाई अनिवार्य होगी। आयोग का उद्देश्य है कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Thursday, January 29, 2026

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव की शिकायतों से निपटने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत अब किसी भी शिकायत पर 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक कार्रवाई अनिवार्य होगी। आयोग का उद्देश्य है कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ने और काम करने वाले सभी लोगों को समान अवसर और सुरक्षित माहौल मिल सके।

नई व्यवस्था के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद संस्थान के प्रमुख 7 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू करेंगे। अगर मामला गंभीर हुआ और कानूनी कार्रवाई की जरूरत पड़ी, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों को इसकी सूचना दी जाएगी।

UGC की नई गाइडलाइन: क्या है पूरा मामला

अगर किसी मामले में शिकायत खुद संस्थान के प्रमुख के खिलाफ आती है, तो ऐसी स्थिति में जांच समिति की बैठक की अध्यक्षता समान अवसर केंद्र के समन्वयक करेंगे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। UGC का कहना है कि यह व्यवस्था इसलिए लाई गई है ताकि किसी भी स्तर पर शक्ति का दुरुपयोग न हो और पीड़ित को न्याय मिल सके।

अपील की प्रक्रिया भी तय

नई गाइडलाइन में अपील का भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति समिति की जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है, तो वह रिपोर्ट मिलने के 30 दिनों के भीतर लोकपाल के पास अपील कर सकता है।

लोकपाल जरूरत पड़ने पर एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) की नियुक्ति कर सकते हैं। इस न्याय मित्र का शुल्क संबंधित उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा वहन किया जाएगा। लोकपाल का प्रयास रहेगा कि 30 दिनों के भीतर अपील का निपटारा कर दिया जाए।
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नई गाइडलाइन की जरूरत क्यों पड़ी

बीते वर्षों में सरकारी और निजी कॉलेजों से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव की कई शिकायतें सामने आई हैं। इनमें जाति, धर्म, नस्ल, दिव्यांगता और जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव के आरोप शामिल रहे हैं।

2019 में मुंबई के बीवाईएल नायर अस्पताल की डॉक्टर पायल तड़वी की आत्महत्या का मामला भी इसी तरह के आरोपों के कारण चर्चा में आया था। ऐसे मामलों ने यह साफ कर दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में सख्त और प्रभावी तंत्र की जरूरत है।

नई गाइडलाइन का विरोध क्यों हो रहा

इस गाइडलाइन को लेकर कुछ वर्गों में नाराजगी भी देखी जा रही है। विरोध करने वालों का कहना है कि इससे जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ गलत शिकायतों का खतरा बढ़ सकता है। उनका आरोप है कि नई गाइडलाइन में गलत या झूठी शिकायत पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं रखा गया है, जो पहले मौजूद था।

इसके अलावा समिति में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व को अनिवार्य न करने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी मुद्दे पर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे के बाद विवाद और गहरा गया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज

शिवसेना (उद्धव गुट) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस गाइडलाइन को लेकर चिंता जताई और इसे पूर्वाग्रह से भरा बताया। कांग्रेस के प्रदेश नेताओं ने भी सरकार पर समाज को बांटने का आरोप लगाया।

वहीं दूसरी ओर, आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद ने इस नियम का समर्थन करते हुए इसे वंचित वर्गों के लिए जरूरी कदम बताया। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुरूप है और सभी वर्गों पर समान रूप से लागू होगा।केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि नए नियम का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा और सरकार इस पर कड़ी नजर रखेगी।

शिक्षण संस्थानों को क्या-क्या करना होगा

नई गाइडलाइन के तहत:

  • प्रवेश के समय छात्र, शिक्षक और कर्मचारी को घोषणापत्र देना होगा
  • कैंपस में जागरूकता अभियान और कार्यशालाएं आयोजित करनी होंगी
  • छात्रों की मदद के लिए काउंसलर की व्यवस्था करनी होगी
  • समान अवसर केंद्र को सक्रिय रूप से काम करना होगा

नियम न मानने पर कड़ी कार्रवाई

UGC ने साफ किया है कि यदि कोई संस्थान गाइडलाइन का पालन नहीं करता है, तो:

  • उसे UGC की योजनाओं से बाहर किया जा सकता है
  • डिग्री और डिस्टेंस एजुकेशन प्रोग्राम पर रोक लग सकती है
  • यहां तक कि संस्थान को मान्यता सूची से हटाया भी जा सकता है

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