77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी में समारोहों की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से हुई। P.M.Narendra Modi ने ऐतिहासिक इंडिया गेट परिसर में स्थित स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
P.M.Narendra Modi के शीर्ष सैन्य नेतृत्व रहा मौजूद
इस भावपूर्ण अवसर पर P.M.Narendra Modi के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी.एस. सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर शहीदों को नमन किया।
परंपरा और सम्मान का प्रतीक
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित करने की यह परंपरा गणतंत्र दिवस समारोह की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। यह उन सैनिकों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता को दर्शाती है, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राण अर्पित किए।

‘लास्ट पोस्ट’ की गूंज और मौन श्रद्धांजलि
पुष्पचक्र अर्पण के बाद ‘सलामी शस्त्र’ और ‘शोक शस्त्र’ की प्रक्रिया हुई। इसके साथ ही ‘लास्ट पोस्ट’ की गंभीर धुन पूरे परिसर में गूंजी। सभी उपस्थित लोगों ने सावधान की मुद्रा में खड़े होकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।इसके बाद दो मिनट का मौन रखा गया, जिसकी समाप्ति पर ‘राउज़’ की धुन बजाई गई।श्रद्धांजलि समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ कर्तव्य पथ स्थित सलामी मंच की ओर रवाना हुए, जहां गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा।
संविधान और लोकतंत्र का उत्सव
हर वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवस 1950 में भारतीय संविधान के लागू होने की स्मृति में मनाया जाता है। आज कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में भव्य समारोह होगा, जिसमें भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों की झलक देखने को मिलेगी।






