Hazi Azimuddin ने कहा जहाँ इंसान आज भी अपने हाथों से लिखता है वक्त : जयपुर का कोटा कैलेंडर

पुराने जयपुर की तंग गलियों और रामगंज बाजार की रौनक के बीच एक छोटी-सी दुकान आज भी परंपरा की बड़ी मिसाल है। Hazi Azimuddin की दुकान नंबर 130 पर स्थित नईम बुक डिपो उर्फ कुरान घर में तैयार होता है राजस्थान का मशहूर कोटा कैलेंडर, जो समय,

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UPDATED: Thursday, January 22, 2026

Hazi Azimuddin

पुराने जयपुर की तंग गलियों और रामगंज बाजार की रौनक के बीच एक छोटी-सी दुकान आज भी परंपरा की बड़ी मिसाल है। Hazi Azimuddin की दुकान नंबर 130 पर स्थित नईम बुक डिपो उर्फ कुरान घर में तैयार होता है राजस्थान का मशहूर कोटा कैलेंडर, जो समय, आस्था और भरोसे का प्रतीक बन चुका है।

Hazi Azimuddin ने कहा की कोटा कैलेंडर, सिर्फ तारीख नहीं, परंपरा की पहचान

यह कैलेंडर केवल दिन और तारीख बताने का जरिया नहीं है, बल्कि इसमें आस्था, धार्मिक विश्वास और वर्षों का अनुभव जुड़ा है। गुलाबी-सफेद रंग में छपने वाला यह सादा कैलेंडर आज भी चांद की तारीखों के लिए सबसे भरोसेमंद माना जाता है। 75 वर्षीय  Hazi Azimuddin पिछले 15 वर्षों से अपने हाथों से कोटा कैलेंडर तैयार कर रहे हैं। उनके लिए यह काम रोज़गार नहीं, बल्कि इबादत और जिम्मेदारी है। लोग पूरे साल इसी कैलेंडर पर भरोसा करते हैं।
Hazi Azimuddin

कोटा से जयपुर तक का सफर

इस कैलेंडर की शुरुआत कोटा में काज़ी सलाउद्दीन साहब ने की थी, ताकि आम लोगों तक सही इस्लामी चांद की तारीखें पहुंच सकें। करीब 15 साल पहले इसकी जिम्मेदारी जयपुर के नईम बुक डिपो को सौंपी गई और यहीं से इसका नया दौर शुरू हुआ।

30 हजार प्रतियां, देश-विदेश तक पहचान

जहाँ पहले साल में गिनती के कैलेंडर बनते थे, वहीं आज हर साल करीब 30 हजार कोटा कैलेंडर छपते हैं। राजस्थान से लेकर मध्यप्रदेश और विदेशों तक रहने वाले लोग इसे अपने साथ ले जाते हैं।कोटा कैलेंडर की खासियत है कि इसमें

  • हिंदी पंचांग
  • अंग्रेज़ी ग्रेगोरियन
  • इस्लामी चांद की तारीख
    तीनों एक साथ दर्ज होती हैं। साथ ही उर्स, त्योहार, चांद की स्थिति और धार्मिक संदेश भी शामिल रहते हैं।

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