रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने ट्रंप के ‘पीस काउंसिल’ में शामिल होने पर जताई रुचि

रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संस्था “पीस काउंसिल” में शामिल होने के निमंत्रण पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। यह मंच वैश्विक संघर्षों, खासकर इजराइल-फिलिस्तीन विवाद और गाजा में पुनर्निर्माण पर केंद्रित है। Vladimir Putin ने 1 अरब डॉलर

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Thursday, January 22, 2026

Vladimir Putin

रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संस्था “पीस काउंसिल” में शामिल होने के निमंत्रण पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। यह मंच वैश्विक संघर्षों, खासकर इजराइल-फिलिस्तीन विवाद और गाजा में पुनर्निर्माण पर केंद्रित है।

Vladimir Putin ने 1 अरब डॉलर योगदान की पेशकश

रूसी सरकारी एजेंसी RT के अनुसार, Vladimir Putin ने कहा है कि रूस इस काउंसिल के लिए 1 अरब अमेरिकी डॉलर देने को तैयार है। यह राशि अमेरिका में फ्रीज की गई रूसी संपत्तियों से दी जा सकती है।पुतिन ने यह बयान रूसी सुरक्षा परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने कहा कि रूस फिलहाल काउंसिल में भागीदारी को लेकर अंतिम फैसला नहीं कर पाया है, लेकिन मानवीय सहायता और स्थिरता के प्रयासों का समर्थन करता है।
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फिलिस्तीन से ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र

पुतिन ने कहा कि रूस के फिलिस्तीनी लोगों के साथ विशेष संबंध रहे हैं और वह हमेशा अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता को मजबूत करने वाले प्रयासों के साथ खड़ा रहा है।हालांकि पुतिन ने ट्रंप को निमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि रूस इस प्रस्ताव का अध्ययन करेगा और अपने रणनीतिक साझेदारों से सलाह के बाद ही अंतिम निर्णय लेगा।

ट्रंप की 20-पॉइंट पीस प्लान का हिस्सा

डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, यह पीस काउंसिल उनकी 20-पॉइंट शांति योजना के दूसरे चरण का हिस्सा है। इसका मकसद गाजा संघर्ष को समाप्त करना और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण की निगरानी करना है।व्हाइट हाउस के मुताबिक, प्रस्तावित बोर्ड इन अहम क्षेत्रों पर काम करेगा:

  • प्रशासनिक क्षमता निर्माण
  • क्षेत्रीय सहयोग
  • पुनर्निर्माण कार्य
  • निवेश और पूंजी जुटाना
  • दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना
  • योगदान पर मिलेगी स्थायी सीट

इस योजना के तहत जो देश 1 अरब डॉलर का योगदान देंगे, उन्हें बोर्ड में स्थायी सदस्यता मिलेगी। अन्य देशों को तीन साल की सीमित सदस्यता दी जाएगी।

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