विश्व आर्थिक मंच (WEF) की Global Risk Report 2026 दुनिया के भविष्य को लेकर गंभीर संकेत देती है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक सहयोग कमजोर हो रहा है और उसकी जगह टकराव, अविश्वास और प्रतिस्पर्धा ने ले ली है। आर्थिक मंदी, युद्ध और जलवायु संकट इस माहौल को और जटिल बना रहे हैं।
WEF रिपोर्ट की पृष्ठभूमि
यह WEF की 21वीं ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट है, जो 1,300 से अधिक वैश्विक नेताओं और जोखिम विशेषज्ञों के सर्वे पर आधारित है। रिपोर्ट साफ करती है कि दुनिया अब “Age of Competition” में प्रवेश कर चुकी है, जहां सहयोग से ज्यादा होड़ हावी है।

आने वाले समय को लेकर डराने वाला अनुमान
सर्वे में शामिल आधे से ज्यादा विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दो वर्षों में वैश्विक स्तर पर अस्थिरता और तनाव बढ़ेगा। करीब 90% विशेषज्ञों को अगले 10 सालों में भी हालात संकटपूर्ण या असंतुलित रहने की आशंका है।
मौजूदा और भविष्य के बड़े खतरे
रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय दुनिया तीन बड़े खतरों से जूझ रही है—
- युद्ध और सशस्त्र संघर्ष
- व्यापार और वित्त को हथियार की तरह इस्तेमाल करना
- समाज में बढ़ता ध्रुवीकरण
इसके साथ ही तेज़ी से बढ़ती तकनीक (AI) और बिगड़ता पर्यावरण आने वाले वर्षों में और बड़े संकट बन सकते हैं।
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता
WEF के Executive Opinion Survey 2025 के अनुसार, भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम Cyber Insecurity है। तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम, खासकर इंडिया स्टैक और UPI, ने साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ा दिया है।
भारत से जुड़े अन्य प्रमुख जोखिम
रिपोर्ट में भारत के लिए कई और गंभीर चुनौतियों का जिक्र किया गया है—
- आय और संपत्ति की बढ़ती असमानता
- सार्वजनिक सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा की कमजोरियां
- वैश्विक मंदी और वित्तीय जोखिम
- पड़ोसी देशों के साथ भू-राजनीतिक तनाव
जल सुरक्षा: भविष्य का बड़ा टकराव
WEF ने चेतावनी दी है कि अगले दशक में जल सुरक्षा भारत के लिए एक बड़ा विवादित मुद्दा बन सकती है। खासतौर पर सिंधु नदी घाटी को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को हाई-रिस्क जोन बताया गया है।
UPI: भारत की सकारात्मक पहचान
जोखिमों के बीच रिपोर्ट ने भारत की डिजिटल सफलता की सराहना भी की है। UPI को वैश्विक स्तर पर “Best Practice” बताया गया है और अन्य देशों को इसे अपनाने की सलाह दी गई है, ताकि बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाया जा सके।






