ईरान में उथल-पुथल के बीच Reza Pahlavi की वापसी: निर्वासन, विरासत और लोकतांत्रिक दावेदारी

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच Reza Pahlavi फिर से सुर्खियों में हैं। वह ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के सबसे बड़े पुत्र हैं, जिन्हें 1979 की इस्लामी क्रांति में पदच्युत कर दिया गया था। हाल के प्रदर्शनों के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया के

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Sunday, January 11, 2026

Reza Pahlavi

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच Reza Pahlavi फिर से सुर्खियों में हैं। वह ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के सबसे बड़े पुत्र हैं, जिन्हें 1979 की इस्लामी क्रांति में पदच्युत कर दिया गया था। हाल के प्रदर्शनों के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से नए प्रदर्शन और लोकतांत्रिक बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ईरानी शासन अब बुरी तरह घबराया हुआ है और विरोध प्रदर्शन रोकने के लिए इंटरनेट को बंद करने जैसी कोशिशें कर रहा है। सवाल उठता है कि यह पूर्व युवराज कौन हैं, जो अपने देश के भविष्य में एक बार फिर भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं।

Reza Pahlavi का शाही उत्तराधिकारी से निर्वासित जीवन तक

Reza Pahlavi का जन्म अक्टूबर 1960 में तेहरान में हुआ। उन्हें जन्म से ही शाही उत्तराधिकारी बनने के लिए तैयार किया गया था और उनका बचपन शाही विशेषाधिकार, शिक्षक और सैन्य प्रशिक्षण के बीच बीता। 17 वर्ष की आयु में उन्हें अमेरिका के टेक्सास भेजा गया, जहाँ उन्होंने लड़ाकू विमान उड़ाने का प्रशिक्षण लिया। लेकिन घर लौटने और राजसिंहासन संभालने से पहले ही 1979 की क्रांति ने उनके पिता के शासन को उखाड़ फेंका। उनके पिता को मिस्र में कैंसर से मृत्यु हो गई और परिवार कई देशों में शरण लेने को विवश हो गया। इस समय रज़ा पहलवी की छोटी बहन और भाई ने भी आत्महत्या कर ली। इन दुखद घटनाओं ने उन्हें शाही परिवार के प्रतीकात्मक मुखिया के रूप में स्थापित कर दिया।
Reza Pahlavi

अमेरिका में सादगीपूर्ण जीवन

आज 65 वर्ष की उम्र में रज़ा पहलवी अमेरिका के वाशिंगटन डी.सी. के पास एक शांत उपनगर में रहते हैं। उनके समर्थकों के अनुसार वह सादगीपूर्ण जीवन जीते हैं, सुरक्षा गार्ड के बिना स्थानीय कैफे में अपनी पत्नी यास्मीन के साथ देखे जाते हैं और आम लोगों के साथ सहज बातचीत करते हैं। 2022 में एक राहगीर ने उनसे पूछा कि क्या वह खुद को ईरान विरोधी आंदोलन के नेता के रूप में देखते हैं, तो उन्होंने और उनकी पत्नी ने कहा कि बदलाव देश के भीतर से ही आना चाहिए।

राजनीतिक रुख और अंतरिम सरकार का प्रस्ताव

हाल के वर्षों में रज़ा पहलवी (Reza Pahlavi) ने राजनीतिक आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखी है। 2025 में इजरायली हवाई हमलों में कई शीर्ष ईरानी सैन्य अधिकारियों के मारे जाने के बाद, उन्होंने पेरिस में कहा कि यदि मौजूदा ईरानी सरकार गिरती है, तो वह अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने को तैयार हैं। इसके लिए उन्होंने 100 दिनों का अंतरिम प्रशासन कार्यक्रम भी पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य अतीत की राजशाही को लौटाना नहीं है, बल्कि ईरानी जनता के लिए लोकतांत्रिक भविष्य सुनिश्चित करना है। इनकी अमेरिका में राजनीति विज्ञान का अध्ययन किया और ईरानी-अमेरिकी नागरिक यास्मीन से विवाह किया। उनकी तीन बेटियां हैं – नूर, एमोन और फराह। निर्वासन में रहते हुए उन्होंने अपने परिवार का पालन-पोषण किया, लेकिन हमेशा ईरानी राजनीति पर ध्यान बनाए रखा।

अंतरराष्ट्रीय मंच और विवाद

निर्वासन में भी वह शाही समर्थकों के लिए प्रतीक बने रहे। उनके समर्थकों के अनुसार, पहलवी युग आधुनिकता और पश्चिम के साथ घनिष्ठ संबंधों का प्रतीक था, जबकि आलोचक इसे सेंसरशिप और खुफिया एजेंसी SAVAK के आतंक से जोड़ते हैं। 1980 में उन्होंने काहिरा में प्रतीकात्मक राज्याभिषेक किया और खुद को शाह घोषित किया। हालांकि इसका व्यावहारिक प्रभाव नगण्य था, इसके बावजूद उनके राजनीतिक आलोचक इसे उनके मौजूदा लोकतांत्रिक बयानों पर सवाल उठाने का कारण मानते हैं। उन्होंने विपक्षी गठबंधन बनाने की कई कोशिशें भी की, जैसे 2013 में ईरान की राष्ट्रीय स्वतंत्र चुनाव परिषद का गठन।उनके प्रयासों में आंतरिक मतभेदों और सीमित प्रभाव के कारण बड़ी सफलता नहीं मिली। रज़ा पहलवी ने हमेशा हिंसा से दूरी बनाए रखी और सशस्त्र गुटों से जुड़ने से इनकार किया। वह बार-बार शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण और राष्ट्रीय जनमत संग्रह के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रिया की वकालत करते रहे।

हिंसा से दूरी और शांतिपूर्ण बदलाव की वकालत

इन्होंने वैश्विक मंच पर भी सक्रिय भूमिका निभाई। 2017 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान उनके दादा रज़ा शाह की याद में नारे लगाए गए। 2022 में महसा अमिनी की मौत और उसके बाद हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रमुख बनाया। आलोचक कहते हैं कि निर्वासन में बीते चार दशकों में वह एक मजबूत संगठन या स्वतंत्र मीडिया नहीं बना पाए। 2023 में इज़राइल की उनकी यात्रा और प्रधानमंत्री नेतन्याहू से मुलाकात ने नए विवाद पैदा किए। कुछ इसे कूटनीतिक कदम मानते हैं, तो अन्य इसे ईरान के अरब और मुस्लिम सहयोगियों को अलग-थलग करने की कोशिश के रूप में देखते हैं। उन्होंने बीबीसी को दिए साक्षात्कार में कहा कि आम ईरानी नागरिक इजरायली हमलों का लक्ष्य नहीं हैं और वह ईरानी शासन को कमजोर करने वाली किसी भी चीज़ का स्वागत करेंगे।आज स्वयं को केवल सिंहासन के उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। उनका लक्ष्य ईरान को निष्पक्ष चुनाव, कानून का शासन और महिलाओं के समान अधिकार दिलाना है। वह जनता पर छोड़ना चाहते हैं कि वे राजशाही को बहाल करें या गणतंत्र स्थापित करें। उनके समर्थक उन्हें शांतिपूर्ण परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय मान्यता के प्रतीक के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक कहते हैं कि वह विदेशी समर्थन पर अत्यधिक निर्भर हैं। दशकों की राजनीतिक अस्थिरता से ऊब चुकी जनता क्या किसी निर्वासित नेता पर भरोसा करेगी या नहीं, यह अनिश्चित है।

भविष्य की अनिश्चितता

ईरानी सरकार उन्हें खतरा मानती है। पहलवी के पिता का शव आज भी काहिरा में दफन है। राजतंत्रवादी आशा करते हैं कि एक दिन इसे प्रतीकात्मक रूप से ईरान लौटाया जाएगा। लेकिन यह देखना अभी बाकी है कि रज़ा पहलवी (Reza Pahlavi)वह दिन देख पाएंगे या स्वतंत्र ईरान का अनुभव कर पाएंगे। उनकी कहानी शाही विरासत, निर्वासन, व्यक्तिगत त्रासदी और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का मिश्रण है। रज़ा पहलवी अब केवल एक राजकुमार नहीं, बल्कि ईरान में संभावित लोकतांत्रिक परिवर्तन और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में खड़े हैं, जिनका भविष्य अनिश्चित होते हुए भी देश और दुनिया की निगाहों में लगातार केंद्रित है।

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