धरती का लगातार बढ़ता तापमान, Global Warming और उसके चलते हो रहा जलवायु परिवर्तन अब पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। मौसम के बदलते पैटर्न, रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और हीटवेव की घटनाएं इस संकट की साफ तस्वीर पेश कर रही हैं। इसी बीच ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक नई स्टडी रिपोर्ट ने हालात को और ज्यादा चिंताजनक बताया है।
Global Warming :2050 तक आधी दुनिया पर मंडराएगा खतरा
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टडी के मुताबिक अगर Global Warming का स्तर 2050 तक 2 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया, तो दुनिया की करीब 3.79 अरब आबादी को भीषण गर्मी में जीवन गुजारना पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि विश्व की लगभग आधी जनसंख्या एक्सट्रीम हीट की चपेट में आ जाएगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए यह आशंका पूरी तरह वास्तविक है।

पेरिस एग्रीमेंट का लक्ष्य खतरे में
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पेरिस एग्रीमेंट में ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया गया था। हालांकि मौजूदा ट्रेंड यह संकेत दे रहे हैं कि धरती का तापमान इस सीमा को पार कर सकता है। स्टडी में कहा गया है कि जैसे ही यह सीमा टूटेगी, गर्मी का असर तेजी से बढ़ने लगेगा।
बीते वर्षों में कितनी बिगड़ी स्थिति
रिपोर्ट बताती है कि साल 2010 में दुनिया की लगभग 23 प्रतिशत आबादी अत्यधिक गर्मी वाले इलाकों में रह रही थी। लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 41 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। यानी बीते एक दशक में हीट स्ट्रेस झेलने वाले लोगों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।






