पक्की छत, पुख्ता हकीकत PMAY: यूपी में मुस्लिम परिवारों को मिला जनसंख्या से ज्यादा आवास लाभ !

देश के कई हिस्सों में उत्तर प्रदेश को लेकर यह धारणा बनाई जाती रही है कि अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर मुस्लिम समाज, को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) से जुड़े आंकड़े और लाभार्थियों के अनुभव इस सोच को चुनौती देते

EDITED BY: thevocalbharat.com

UPDATED: Sunday, January 25, 2026

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देश के कई हिस्सों में उत्तर प्रदेश को लेकर यह धारणा बनाई जाती रही है कि अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर मुस्लिम समाज, को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) से जुड़े आंकड़े और लाभार्थियों के अनुभव इस सोच को चुनौती देते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ–सबका विकास” के विजन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ज़मीनी स्तर पर लागू किया गया है। इसका सबसे ठोस उदाहरण प्रधानमंत्री आवास योजना के रूप में सामने आया है, जिसने हजारों नहीं बल्कि लाखों मुस्लिम परिवारों को सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ाया है।

PMAY के आंकड़े क्या कहते हैं :

PMAY सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2017 से जनवरी 2026 के बीच उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण और शहरी) के तहत करीब 60 से 62 लाख परिवारों को पक्के घर मिले हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सार्वजनिक बयानों के मुताबिक, इनमें लगभग 21 लाख आवास मुस्लिम परिवारों को आवंटित किए गए।

हालांकि धर्म-आधारित आधिकारिक डेटा सार्वजनिक नहीं है, लेकिन इन अनुमानों के आधार पर मुस्लिम लाभार्थियों की हिस्सेदारी करीब 30 से 35 प्रतिशत मानी जाती है। यह आंकड़ा इसलिए भी अहम है क्योंकि राज्य की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 18–19 प्रतिशत है।
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चयन प्रक्रिया: धर्म नहीं, जरूरत बनी आधार

प्रधानमंत्री आवास योजना का क्रियान्वयन पूरी तरह पात्रता और आर्थिक स्थिति के आधार पर किया गया। जिन जिलों में गरीबी, कच्चे मकान और आवासहीनता अधिक थी, वहां योजना का लाभ भी उसी अनुपात में पहुंचा।

यदि कुल 62 लाख आवासों में 30–35 प्रतिशत हिस्सेदारी मानी जाए, तो मुस्लिम लाभार्थियों की संख्या लगभग 18.6 लाख से 21.7 लाख के बीच बैठती है। यह स्पष्ट करता है कि योजना का उद्देश्य सामाजिक समावेशन रहा, न कि किसी वर्ग को अलग करना।

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