नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस दिन को केंद्र सरकार ने पराक्रम दिवस के रूप में घोषित किया है, जो नेताजी के अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।विदेश मंत्री Dr.S. Jaishankar ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि नेताजी का संकल्प, बलिदान और मातृभूमि के प्रति निष्ठा आज भी आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में मार्गदर्शन करती है।
Dr.S. Jaishankar सहित पीएम मोदी ने किया नेताजी के योगदान को याद
Dr.S. Jaishankar और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी के साहस और देशभक्ति को याद करते हुए कहा कि उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि नेताजी निडर नेतृत्व और अटूट राष्ट्रप्रेम का प्रतीक थे।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी X पर पोस्ट साझा कर नेताजी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) में नेताजी की निर्णायक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रभाव को रेखांकित किया।

2021 में पराक्रम दिवस की हुई थी घोषणा
केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में 23 जनवरी को आधिकारिक तौर पर पराक्रम दिवस घोषित किया था। इसके बाद नेताजी की स्मृति में कई ऐतिहासिक पहल की गईं।वर्ष 2022 में इंडिया गेट पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया गया।2023 में अंडमान-निकोबार के 21 द्वीपों का नाम 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा गया।2024 में पीएम मोदी ने लाल किले में पराक्रम दिवस कार्यक्रम का उद्घाटन किया, जो INA ट्रायल्स से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल है।
नेताजी का जीवन और विरासत
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में हुआ था। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत की आज़ादी की लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभाई। उनका जीवन साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति की अमर मिसाल है।






