CNN की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने यह स्पष्ट करने से इनकार कर दिया कि अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर की जब्ती के बाद क्या उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की थी। फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना के पहुंचते ही रूसी जहाज और पनडुब्बी तेजी से पीछे हट गए और टैंकर पर कब्जा कर लिया गया।
तेल को लेकर Donald Trump के दावे पर सवाल
अमेरिकी सेना ने खुले समुद्र में हफ्तों तक पीछा करने के बाद बुधवार को टैंकर पर चढ़ाई कर उसे जब्त किया। इस कार्रवाई से मॉस्को के साथ तनाव और रूस के सहयोगी वेनेजुएला पर दबाव बढ़ गया है।Donald Trump ने दावा किया कि टैंकर से तेल उतारा जा रहा है, लेकिन एनालिटिक्स फर्म Kpler के अनुसार, जब जहाज को जब्त किया गया, तब उसमें कोई तेल मौजूद नहीं था।

‘शैडो फ्लीट’ से जुड़ा था जहाज
पुराना टैंकर, जिसका मूल नाम बेला 1 था, को 2024 में अमेरिका ने प्रतिबंधित किया था। यह कथित रूप से अवैध ईरानी तेल ढोने वाली तथाकथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा था। बाद में जहाज ने रूसी झंडा अपनाया और ‘मरीनरा’ नाम से रूसी रजिस्ट्री में दर्ज हुआ। CNN के मुताबिक, ऑपरेशन से पहले अमेरिका ने UK में सैन्य संसाधनों को फिर से तैनात किया। इस कार्रवाई में US नेवी SEALs और स्पेशल ऑपरेशंस एविएशन रेजिमेंट की भूमिका रही, जबकि UK रक्षा मंत्रालय ने सहायता की पुष्टि की।रूस ने इस जब्ती को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए निंदा की और रूसी नागरिकों को वापस भेजने की मांग की। चीन ने भी इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन” करार दिया।
हालांकि जहाज की जब्ती की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन ऑपरेशन के दौरान रूसी नौसैनिक जहाज कितने करीब थे और आगे कूटनीतिक असर क्या होगा, इस पर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।
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