भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। नई दिल्ली में हुए इस ऐतिहासिक समझौते से दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।Scott Bessent यह डील ऐसे समय में सामने आई है, जब दुनिया पहले से ही युद्ध, आर्थिक मंदी और भू-राजनीतिक खींचतान से जूझ रही है। ऐसे में भारत और यूरोप का एक-दूसरे के करीब आना कई वैश्विक शक्तियों को असहज कर रहा है।
Scott Bessent अमेरिका की खुली नाराज़गी
FTA पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद अमेरिका की प्रतिक्रिया तीखी रही। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि यह समझौता उसके रणनीतिक और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचा सकता है।अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent के हालिया बयान ने इस नाराज़गी को सार्वजनिक मंच पर ला दिया है। उनके अनुसार, यूरोपीय संघ ने अमेरिका की अपेक्षाओं को नजरअंदाज करते हुए अपने व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दी है।

यूरोप पर अमेरिकी वित्त मंत्री का सीधा हमला
सीएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत के साथ FTA यह दिखाता है कि यूरोपीय संघ ने यूक्रेन युद्ध जैसे गंभीर मुद्दों से ऊपर अपने कारोबारी फायदे को रखा।
उन्होंने कहा कि हर देश को अपने हितों की रक्षा करने का अधिकार है, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात में यूरोप का यह फैसला अमेरिका के लिए निराशाजनक है।बेसेंट के मुताबिक, यह कदम उस रणनीतिक साझेदारी के खिलाफ है, जिसकी उम्मीद अमेरिका यूरोप से करता रहा है।






